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विवरा-रणगांव रस्ता व नाला कामासाठी शिवसेना उबाठाचे आमरण उपोषण सुरू

मलकापूर तालुक्यातील विवरा गावातील अपूर्ण नाला खोलीकरण काम तसेच विवरा-रणगांव रस्ता तातडीने पूर्ण करण्याच्या मागणीसाठी शिवसेना (उबाठा) पदाधिकारी व ग्रामस्थांनी सोमवार, 18 मे 2026 रोजी उपविभागीय अधिकारी कार्यालयासमोर आमरण उपोषणाला सुरुवात केली. शिवसेना उपजिल्हाप्रमुख गजानन ठोसर, विधानसभा संघटक राजेशसिंह राजपूत आणि शहरप्रमुख हरीदास गणबास यांच्या नेतृत्वाखाली हे आंदोलन सुरू करण्यात आले आहे.
विवरा गावात गतवर्षी 16 सप्टेंबर 2025 रोजी झालेल्या ढगफुटीमुळे मोठ्या प्रमाणात अतिवृष्टी झाली होती. या पावसाचे पाणी ग्रामस्थांच्या घरांमध्ये घुसल्याने शेकडो कुटुंबांचे नुकसान झाले होते. त्यानंतर गावातील नाला खोलीकरणाचे काम मंजूर झाले होते, मात्र संबंधित ठेकेदाराने हे काम अपूर्ण अवस्थेत सोडल्याचा आरोप ग्रामस्थांनी केला आहे. तसेच विवरा-रणगांव रस्त्याचे कामही रखडले असून गावाजवळील दलित वस्तीत सांडपाणी साचत असल्याने नागरिकांना मोठा त्रास सहन करावा लागत आहे.
या समस्यांबाबत शिवसेना (उबाठा) पदाधिकाऱ्यांनी यापूर्वी उपविभागीय अधिकारी संतोष शिंदे यांना निवेदन दिले होते. 1 मे 2026 रोजी महाराष्ट्र दिनी ग्रामस्थांनी नाल्यात उतरून आमरण उपोषणही केले होते. त्यावेळी प्रशासनाने कामे पूर्ण करण्याचे आश्वासन दिले होते. मात्र अद्याप कोणतीही कार्यवाही न झाल्याने अखेर पुन्हा उपोषणाचा मार्ग स्वीकारण्यात आला आहे.
उपोषणकर्त्यांनी विवरा-रणगांव रस्त्यावर दुतर्फा नाली बांधकाम करून रस्ता कॉंक्रिटीकरणासह पूर्ण करण्याची मागणी केली आहे. तसेच मंजूर नाला खोलीकरण काम तातडीने पूर्ण करण्यात यावे, अशी मागणी आंदोलनकर्त्यांनी केली आहे.
या आमरण उपोषणात बळीराम राणे, शेषराव तायडे, सुखदेव वाढसे, देवराव तायडे, अभिजीत तायडे, विष्णू राणे, उमेश पाटील, विजय चौधरी, शालीग्राम कडू, गणेश पठाडे, समाधान तायडे, राजेंद्र गुरचळ, वासुदेव भोगे, सागर तायडे, चेतन राणे, विलास तायडे, दीपक तळे, सूर्यभान कवडे, दिलदार पिंजारी, शुभम आढाव, अमित राजपूत, नामदेव सोनवणे, विशाल पाटील, राहुल पाटील, प्रदीप हिरळकर, प्रमोद डमाळे, रामदास संबारे, भगवान धांडे, ओंकार पाटील, भूषण पाटील, गजानन नाफडे, घनश्याम चोपडे, मधुकर पाटील, अर्जुन चोपडे, प्रशांत कडू, ईश्वर पाटील, मोहन चोपडे, रोशन बोदडे, ज्ञानेश्वर भगत, यश झाल्टे यांच्यासह मोठ्या संख्येने ग्रामस्थ सहभागी झाले आहेत.
या आंदोलनाला शिवसेना उपशहर प्रमुख बाळू पोलाखरे, माजी नगरपरिषद उपाध्यक्ष महादेव वनारे, माजी नगरसेवक पांडुरंग चिम, वाहतूक सेना शहरप्रमुख इम्रान लकी, किसान सेना तालुकाप्रमुख महादेव पवार, उपतालुकाप्रमुख विश्वनाथ पुरकर, विभाग प्रमुख सत्तार शाह, माजी जिल्हा परिषद उपाध्यक्ष सोपान शेलकर, विजय झांबरे आणि हरिदास शिंदे आदींनी भेट देऊन पाठिंबा दर्शविला.

Nandura

नांदुरा नगरपरिषदेसमोर समाजवादी पक्षाचे ‘जन आक्रोश आंघोळ आंदोलन’; गैबीनगर पाणीप्रश्नावर संताप

नांदुरा पतिनिधि | Viral News Live

नांदुरा नगरपरिषदेसमोर समाजवादी पक्षाचे ‘जन आक्रोश आंघोळ आंदोलन’; गैबीनगर पाणीप्रश्नावर संताप

नांदुरा येथील गैबीनगर परिसरातील पाणीपुरवठ्याच्या प्रश्नावर समाजवादी पक्षाच्या वतीने सोमवारी नांदुरा नगरपरिषद कार्यालयासमोर ‘जन आक्रोश आंघोळ आंदोलन’ करण्यात आले. समाजवादी पक्षाचे जिल्हाध्यक्ष आझाद पठाण यांच्या नेतृत्वाखाली हे आंदोलन पार पडले. शहरातील सर्वात मोठ्या मुस्लिम वस्तीत मूलभूत सुविधांचा अभाव असल्याचा आरोप करत नागरिकांनी नगरपरिषद प्रशासनाविरोधात संताप व्यक्त केला.

समाजवादी पक्षाच्या वतीने यापूर्वीच नगरपरिषदेच्या मुख्याधिकाऱ्यांना निवेदन देत आंदोलनाचा इशारा देण्यात आला होता. गैबीनगर परिसरात गेल्या अनेक वर्षांपासून मोठ्या प्रमाणात नागरिक वास्तव्यास असूनही नगरपरिषदेच्या माध्यमातून नियमित पाणीपुरवठा करण्यात येत नसल्याचा आरोप आंदोलनकर्त्यांनी केला. शहरातील इतर भागात नगरपरिषदेच्या पाणीपुरवठा योजनेद्वारे पाणी उपलब्ध होत असताना गैबीनगरकडे सातत्याने दुर्लक्ष होत असल्याचेही आंदोलनकर्त्यांनी सांगितले.

आझाद पठाण यांनी सांगितले की, परिसरातील नागरिकांना पाणीपुरवठा सुरू करण्यासाठी अनेक वेळा निवेदने देण्यात आली होती. मात्र प्रशासनाने याकडे गांभीर्याने लक्ष न दिल्याने अखेर जनआक्रोश आंदोलन करण्याचा निर्णय घेण्यात आला. सोमवारी सकाळी अकरा वाजता कार्यकर्त्यांसह नगरपरिषद कार्यालयात पोहोचून प्रतीकात्मक आंघोळ आंदोलन करण्यात आले.

आंदोलनादरम्यान नगरपरिषदेचे लोकप्रतिनिधी व मुख्याधिकारी अनुपस्थित असल्याने आंदोलनकर्त्यांनी नाराजी व्यक्त केली. यावेळी पाणीपुरवठा विभागाचे प्रभारी अभियंता नारखेडे यांनी आंदोलनकर्त्यांचे निवेदन स्वीकारून सकारात्मक कार्यवाहीचे आश्वासन दिले.

मोर्चादरम्यान कायदा व सुव्यवस्था राखण्यासाठी नांदुरा पोलीस स्टेशनचे पोलीस उपनिरीक्षक कैलास चौधरी, पोलीस कर्मचारी इंगळे, संजय वराडे, गोपनीय विभागाचे श्रीधर काळे तसेच अन्य पोलीस अधिकारी व कर्मचारी मोठ्या संख्येने बंदोबस्तासाठी तैनात होते. आंदोलनावेळी शहरातील नागरिकांचीही मोठ्या प्रमाणात उपस्थिती होती.

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बुलढाणा: मुफ्त शिक्षा के बावजूद खाली क्यों हैं सरकारी स्कूल? भरोसे के संकट में फंसी जिले की व्यवस्था

​Viral News Live (बुलढाणा): महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में शिक्षा के क्षेत्र में आज एक बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां जिला प्रशासन और सरकार मुफ्त शिक्षा, स्कूल ड्रेस और मिड-डे मील पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिले के ग्रामीण और शहरी इलाकों के सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार कम हो रही है। बुलढाणा, चिखली, खामगांव और मलकापुर जैसे क्षेत्रों में छोटे-छोटे निजी स्कूलों की बाढ़ आ गई है, जो सरकारी व्यवस्था की विफलता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

​बुलढाणा के अभिभावकों में भरोसे का संकट

​यह समस्या केवल फीस की नहीं, बल्कि विश्वास की है। जिले के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी ढांचे की जर्जर हालत किसी से छिपी नहीं है। अभिभावकों के मन में यह धारणा घर कर चुकी है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर वह नहीं है, जो उनके बच्चों को प्रतियोगिता के इस दौर में आगे ले जा सके। यही कारण है कि खेती-मजदूरी करने वाले अभिभावक भी पेट काटकर अपने बच्चों का दाखिला निजी “इंग्लिश मीडियम” स्कूलों में करा रहे हैं।

​’इंग्लिश मीडियम’ का मोह और छोटे निजी स्कूलों का जाल

​बुलढाणा जिले के रिहायशी इलाकों और गांवों की तंग गलियों में खुले छोटे निजी स्कूल आज पहली पसंद बन रहे हैं। ये स्कूल भले ही पूरी तरह सुसज्जित न हों, लेकिन “अंग्रेजी शिक्षा” और “अनुशासन” का ऐसा माहौल पेश करते हैं, जो ग्रामीण अभिभावकों को आकर्षित करता है। उन्हें लगता है कि निजी स्कूल में उनके बच्चे का भविष्य अधिक सुरक्षित है, जबकि सरकारी स्कूल केवल ‘मिड-डे मील’ तक सीमित होकर रह गए हैं।

​क्या केवल योजनाएं काफी हैं?

​बुलढाणा की यह स्थिति दर्शाती है कि सिर्फ मुफ्त सुविधाएं देना ही पर्याप्त नहीं है। जब तक स्कूलों की छवि, पढ़ाई का स्तर और शिक्षकों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक खाली होते क्लासरूम को भरना मुश्किल होगा। जिले में शिक्षा विभाग को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन पर नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता (Quality of Education) में सुधार पर ध्यान देने की सख्त जरूरत है।

बदलाव की दरकार

​स्थिति यह है कि जब तक सरकारी स्कूलों का स्तर निजी स्कूलों के समकक्ष नहीं होगा, तब तक यह विरोधाभास बना रहेगा। आज जरूरत इस बात की है कि बुलढाणा की शिक्षा व्यवस्था में केवल ढांचागत सुधार न हो, बल्कि एक ऐसा शैक्षिक माहौल बने जिससे आम आदमी का सरकारी तंत्र पर विश्वास फिर से बहाल हो सके।

Malkapur News

मलकापुर : AIMIM की जबरदस्त पहल: शहर की सीमा बढ़ाने पर शुरू हुई मुहिम, अब निगाहें नगराध्यक्ष पर

दिनांक 2 जनवरी 2026, शुक्रवार को AIMIM मलकापुर शहर की ओर से मलकापुर की अवाम से किए गए चुनावी वादों को अमल में लाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया। पार्टी ने चुनाव के समय जनता से यह भरोसा दिलाया था कि जैसे ही AIMIM के प्रतिनिधि काउंसिल में पहुंचेंगे, शहर की सीमा से बाहर पड़ी बस्तियों को नगर पालिका की हद में शामिल कराने का प्रस्ताव सबसे पहले लाया जाएगा।

इसी वादे के तहत बाबा मुश्ताक अली नगर, फिरदौस कॉलोनी, नूर मोहम्मद कॉलोनी, मूसा कॉलोनी, हाशमी नगर, फातिमा नगर सहित कई बस्तियों — जो अब तक नगर पालिका की सुविधाओं से बाहर हैं — को मलकापुर नगर पालिका की सीमा में शामिल करने को लेकर एक आधिकारिक मेमो तैयार कर नगराध्यक्ष को सौंपा गया। यह मेमो प्रभाग क्रमांक 9-अ की नगरसेविका शकीला बी असादुल्लाह शाह और प्रभाग क्रमांक 8 की नगरसेविका अस्मत अंजुम अब्दुल कहार के लेटरहेड पर जारी किया गया।

यह पहल AIMIM बुलढाणा जिलाध्यक्ष दानिश शेख और शहराध्यक्ष एड. इमरान राशिद खान के नेतृत्व में हुई। इस दौरान सिद्दीक शाह, अब्दुल कहार (ठेकेदार), शेख मुबाशिर (बबलू भाई), शेख शोएब सहित AIMIM के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

इस पूरी प्रक्रिया के बीच अब चर्चा का बड़ा विषय नगराध्यक्ष पर भी आ टिका है — जो कांग्रेस पार्टी से हैं। चुनाव से पहले नगराध्यक्ष ने जनता के सामने यह कहते हुए भरोसा दिलाया था कि:

“हम वादे नहीं, इरादे लेकर आए हैं… क्योंकि वादे टूट जाते हैं — इरादे नहीं।”

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब AIMIM ने अपना वादा निभाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है, तो क्या नगराध्यक्ष अपने “इरादों” को ज़मीन पर उतारने के लिए उसी तेजी से आगे आएंगे? क्या शहर की सीमा बढ़ाकर उन बस्तियों को भी मुख्यधारा में जोड़ा जाएगा, जिन्हें वर्षों से मूलभूत सुविधाओं का इंतज़ार है?

AIMIM ने साफ़ कहा है कि पार्टी जनता से किए गए हर वादे को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है और शहर के विकास, सड़क-बिजली-पानी, स्वास्थ्य व नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे काउंसिल में मजबूती से उठाए जाएंगे।

अब देखना यह है कि नगर पालिका प्रशासन और नगराध्यक्ष इस प्रस्ताव को कितनी गंभीरता से लेते हैं — और क्या सच में “वादों” की जगह “इरादे” सामने आते हैं।