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तसनीम फ़ैसल बने समाजवादी पार्टी के विदर्भ अध्यक्ष

नागपुर/मुंबई। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक अबू आसिम आज़मी ने संगठन को और अधिक मजबूत एवं सक्रिय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मोहम्मद तसनीम फ़ैसल को समाजवादी पार्टी का विदर्भ अध्यक्ष नियुक्त किया है।

तसनीम फ़ैसल की नियुक्ति से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। नई जिम्मेदारी के तहत उन्हें विदर्भ क्षेत्र में पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को एकजुट करने तथा समाजवादी विचारधारा को विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पार्टी से जुड़े पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने तसनीम फ़ैसल को नई जिम्मेदारी मिलने पर बधाई दी। कार्यकर्ताओं ने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में विदर्भ में संगठनात्मक गतिविधियों को नई गति मिलेगी और पार्टी कार्यकर्ता जनसमस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाते हुए जनता के बीच संगठन को और मजबूत करेंगे।

नई जिम्मेदारी मिलने पर तसनीम फ़ैसल ने समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक अबू आसिम आज़मी, प्रदेश कार्यकारिणी तथा पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं के सम्मान और जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए वे पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्व का निर्वहन करेंगे।

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की विचारधारा, सामाजिक न्याय, लोकतंत्र और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर विदर्भ में संगठन को मजबूत करना उनका प्रमुख लक्ष्य रहेगा।

नियुक्ति के बाद पार्टी के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने तसनीम फ़ैसल को शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की।

इस अवसर पर प्रदेश प्रमुख महासचिव परवेज़ सिद्दीकी, अब्दुल रऊफ़, तजम्मुल हुसैन ख़ान सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

Nandura

चोरीच्या घटनांना आळा घालण्यासाठी रात्रीची पोलीस गस्त वाढविण्याची मागणी

समाजवादी पार्टीचे युवा जिल्हाध्यक्ष आजाद पठाण यांचे पोलीस अधीक्षकांना निवेदन

नांदुरा, दि. २१ सप्टेंबर २०२६ : सण-उत्सवांच्या पार्श्वभूमीवर बुलढाणा जिल्ह्यातील चोरी व घरफोडीच्या घटनांना आळा घालण्यासाठी रात्रीची पोलीस गस्त वाढविण्यासह शहर तसेच ग्रामीण भागातील गल्लीबोळांमध्ये नियमित पेट्रोलिंग करण्यात यावे, अशी मागणी समाजवादी पार्टीचे युवा जिल्हाध्यक्ष आजाद पठाण यांनी केली आहे. यासंदर्भात नांदुरा पोलीस निरीक्षकांमार्फत बुलढाणा जिल्ह्याच्या पोलीस अधीक्षकांना निवेदन सादर करण्यात आले.

सण-उत्सवांच्या काळात नागरिक, व्यापारी तसेच महिलांच्या सुरक्षिततेच्या दृष्टीने संवेदनशील भागांमध्ये विशेष पोलीस गस्त वाढविण्यात यावी, अशी मागणी निवेदनातून करण्यात आली. तसेच बाजारपेठांमध्ये अतिरिक्त पोलीस बंदोबस्त तैनात करावा आणि संशयास्पद व्यक्ती व वाहनांची कायदेशीररीत्या तपासणी करावी, असेही निवेदनात नमूद करण्यात आले आहे.

नागरिकांनी भीतीच्या वातावरणात सण साजरे करण्याऐवजी सुरक्षित व निर्भय वातावरणात सण-उत्सव साजरे करावेत, यासाठी पोलीस प्रशासनाने प्रतिबंधात्मक उपाययोजना तातडीने राबवाव्यात, अशी मागणीही करण्यात आली.

यावेळी शेख नदिम, अझर मिर्झा, तोसीफ बिल्डर, आसीफ खान, मोहम्मद सलीम, शेख अजीम यांच्यासह समाजवादी पार्टीचे पदाधिकारी व कार्यकर्ते उपस्थित होते.

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महाराष्ट्र धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पर असदुद्दीन ओवैसी का कड़ा विरोध, कहा देश के सबसे कठोर कानूनों से भी अधिक सख्त

महाराष्ट्र धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पर असदुद्दीन ओवैसी का कड़ा विरोध, कहा देश के सबसे कठोर कानूनों से भी अधिक सख्त

महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रस्तावित महाराष्ट्र धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस विधेयक की कड़ी आलोचना करते हुए इसे देश में मौजूद अन्य धर्म परिवर्तन विरोधी कानूनों से भी अधिक कठोर और चिंताजनक बताया है। उनका कहना है कि यह विधेयक नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर गंभीर असर डाल सकता है।

यह विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा में ग्रामीण विकास राज्यमंत्री पंकज भोयर द्वारा पेश किया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य जबरदस्ती, धोखाधड़ी, प्रलोभन या अन्य अनुचित तरीकों से होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है। हालांकि विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों का आरोप है कि विधेयक की कई धाराएं अत्यधिक व्यापक और अस्पष्ट हैं, जिनका दुरुपयोग हो सकता है।

असदुद्दीन ओवैसी ने विशेष रूप से विधेयक में शामिल कुछ प्रावधानों पर गंभीर चिंता जताई है। उनके अनुसार विधेयक में शिक्षा के माध्यम से ब्रेनवॉश जैसे अस्पष्ट शब्दों का उपयोग किया गया है, जिससे धार्मिक शिक्षा या धार्मिक विचारों के अध्ययन को भी जबरन धर्म परिवर्तन की श्रेणी में रखा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक पुलिस को बिना किसी पीड़ित या उसके परिवार की शिकायत के स्वतः संज्ञान लेकर जांच और गिरफ्तारी करने का अधिकार देता है, जिससे मनमानी कार्रवाई की आशंका बढ़ जाती है।

विधेयक में यह भी प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन से जुड़े किसी दस्तावेज को तैयार करता है, उसकी पुष्टि करता है या उस पर गवाही देता है, तो उसे भी अपराध में सहयोगी माना जा सकता है। ओवैसी ने चेतावनी दी कि ऐसे प्रावधान अंतरधार्मिक विवाह करने वाले दंपतियों के लिए खतरा बन सकते हैं और स्वेच्छा से किए गए धर्म परिवर्तन को भी अपराध की तरह देखा जा सकता है।

उन्होंने इस विधेयक को संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 25 के तहत प्राप्त निजता और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का खुला उल्लंघन बताया। ओवैसी ने यह भी कहा कि यह विडंबना है कि ऐसा विधेयक उसी महाराष्ट्र में पेश किया गया है जहां वर्ष 1956 में डॉ भीमराव आंबेडकर ने लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म स्वीकार करते हुए सामाजिक समानता और सम्मान का ऐतिहासिक आंदोलन खड़ा किया था।

विपक्षी नेताओं ने भी इस विधेयक पर सवाल उठाए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने इसे सत्तारूढ़ गठबंधन की साजिश बताते हुए कहा कि जबरन धर्म परिवर्तन का विरोध किया जाना चाहिए, लेकिन स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है। समाजवादी पार्टी के नेता रईस शेख ने आशंका जताई कि इस कानून का इस्तेमाल कुछ खास समुदायों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। वहीं कांग्रेस के नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने राज्य के सामने मौजूद अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों के बीच सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए।

नागरिक समाज के कई संगठनों ने भी इस विधेयक का विरोध किया है। महिलाओं के अधिकारों, अल्पसंख्यकों और दलित समुदायों से जुड़े 35 से अधिक संगठनों के एक समूह ने इसे निजता, महिलाओं की स्वायत्तता और मौलिक अधिकारों पर हमला बताया है। इन संगठनों ने आशंका जताई है कि इस कानून को तथाकथित लव जिहाद जैसे आरोपों से जोड़कर दुरुपयोग किया जा सकता है और आवश्यकता पड़ने पर इसे अदालत में चुनौती देने की बात भी कही है।

बॉम्बे कैथोलिक सभा और बॉम्बे आर्चडायोसिस ने भी विधेयक के कई प्रावधानों पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। उनका कहना है कि प्रस्तावित कानून के कुछ प्रावधान अत्यधिक कठोर हैं और इसे व्यापक चर्चा के लिए चयन समिति के पास भेजा जाना चाहिए।

यदि यह विधेयक कानून के रूप में लागू होता है तो महाराष्ट्र उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा जहां धर्म परिवर्तन को लेकर विशेष कानून लागू हैं। हालांकि इस विधेयक में पुलिस को दिए गए व्यापक अधिकार और धर्म परिवर्तन की विस्तृत परिभाषाएं इसे अन्य राज्यों के कानूनों की तुलना में अधिक विवादास्पद बना रही हैं और धार्मिक स्वतंत्रता तथा जबरन धर्म परिवर्तन के बीच संतुलन को लेकर नई बहस को जन्म दे रही हैं।