मुंबई, 25 जून। शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद संजय दिना पाटिल द्वारा एक पत्रकार के संबंध में कथित रूप से की गई अपमानजनक टिप्पणी की वॉइस ऑफ मीडिया – इंटरनेशनल फोरम ने कड़ी निंदा की है। संगठन ने इस मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को विस्तृत ज्ञापन भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
वॉइस ऑफ मीडिया – इंटरनेशनल फोरम के संस्थापक एवं अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप काले के हस्ताक्षर से भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं तथा शासन, प्रशासन और जनता के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में जनप्रतिनिधियों द्वारा पत्रकारों के प्रति अपमानजनक भाषा का उपयोग किया जाना अत्यंत गंभीर विषय है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
ज्ञापन में आगे कहा गया है कि पत्रकारों को प्रश्न पूछने, जानकारी प्राप्त करने और जनता के सामने सत्य प्रस्तुत करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। पत्रकार जब अपनी व्यावसायिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हों, तब उनके प्रति अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना या उन्हें निशाना बनाना स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के वातावरण के लिए हानिकारक हो सकता है।
संगठन ने अपने निवेदन में कहा है कि किसी समाचार या प्रश्न को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इसके आधार पर पत्रकारों का अपमान करना अथवा उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है। इस प्रकार की टिप्पणियों से पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं तथा समाज में पत्रकारों के प्रति गलत संदेश जा सकता है।
वॉइस ऑफ मीडिया ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मांग की है कि वे इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सांसद से सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करने के लिए कहें तथा पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार स्पष्ट और ठोस रुख अपनाए।
संदीप काले ने कहा कि महाराष्ट्र को प्रगतिशील विचारधारा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की समृद्ध परंपरा प्राप्त है। पत्रकारिता का सम्मान बनाए रखना लोकतंत्र की मूलभूत आवश्यकता है। पत्रकारों के खिलाफ होने वाले मौखिक हमलों, धमकियों और अपमानजनक व्यवहार के विरुद्ध सभी स्तरों पर दृढ़ता से खड़े होने की आवश्यकता है।
इस बीच, संगठन की ओर से जानकारी दी गई कि ज्ञापन की प्रतियां राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय, पुलिस महानिदेशक तथा संबंधित राजनीतिक दल के नेतृत्व को भी भेजी गई हैं।
पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए राज्य सरकार इस मामले में शीघ्र और प्रभावी कदम उठाए, ऐसी अपेक्षा विभिन्न पत्रकार संगठनों द्वारा व्यक्त की जा रही है।
