निकाह को इतना आसान बनाओ कि ज़िना मुश्किल हो जाए : मुफ्ती मोहम्मद हारून नदवी
जलगांव में 12 गरीब बेटों-बेटियों का सामूहिक निकाह संपन्न, सादगी और फिजूलखर्ची से बचने का दिया सामाजिक संदेश

जलगांव : आज के दौर में शादियों को सादगी और आसानी के बजाय झूठी शान-ओ-शौकत का प्रदर्शन बना दिया गया है। महंगे लॉन, दिखावटी सजावट, खान-पान, हल्दी-मेहंदी और बारात जैसे आयोजनों पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके कारण समाज के अनेक गरीब परिवार अपनी बेटियों और बेटों की शादी करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। ऐसे माहौल में शादियों को आसान और सस्ता बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यह महत्वपूर्ण संदेश मुस्लिम धर्मगुरु मुफ्ती मोहम्मद हारून नदवी ने जलगांव में आयोजित 12 गरीब बेटों-बेटियों के सामूहिक निकाह समारोह में दिया।
अपने बयान में मुफ्ती मोहम्मद हारून नदवी ने कहा कि निकाह को इतना आसान और सस्ता बनाना चाहिए कि ज़िना मुश्किल हो जाए और कोई भी नौजवान बेटा या बेटी गुनाह की राह पर जाने को मजबूर न हो। उन्होंने कहा कि समाज में शादियों को महंगा और मुश्किल बना दिया गया है, जिसके कारण हजारों युवक-युवतियों के निकाह में देरी हो रही है। शादियों को आसान बनाना और फिजूलखर्ची को खत्म करना समाज के मालदार और जिम्मेदार लोगों की विशेष जिम्मेदारी है। हम सभी को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा, जहां गरीब परिवार भी बिना किसी आर्थिक बोझ के अपने बच्चों का निकाह कर सकें।
इस सराहनीय सामाजिक पहल का आयोजन ऑनलाइन कार्य करने वाले युवाओं के एक समूह द्वारा किया गया। समूह की ओर से यह पहला बड़ा समाजसेवी कार्यक्रम था, जिसकी समाज के गणमान्य लोगों ने खूब प्रशंसा की और आयोजकों को बधाई, मुबारकबाद एवं दुआओं से नवाजा।
जलगांव स्थित इकरा यूनानी मेडिकल कॉलेज के मैदान में आयोजित इस सामूहिक विवाह समारोह में 12 गरीब बेटों-बेटियों के निकाह संपन्न कराए गए। मुफ्ती मोहम्मद हारून नदवी ने निकाह का खुतबा पढ़ाया और उनकी दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर अब्दुल करीम सालार, अब्दुल मजीद जकरिया, फारूक शेख, शमीमा ताई (समाजसेविका, फैजपुर), डॉ. नीलेश चांडक, अमजद पठान, शाहिद पटेल, अनीस शाह सहित बड़ी संख्या में समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों का शॉल और गुलदस्ते भेंट कर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में शामिल लोगों ने इस पहल पर खुशी जाहिर करते हुए आयोजक युवाओं की सराहना की। सामूहिक निकाह का यह आयोजन समाज को सादगी, आपसी सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देने वाला साबित हुआ।



