सावरकर पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, आपराधिक केस और समन खारिज
नई दिल्ली, 14 अगस्त। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को विनायक दामोदर सावरकर के संबंध में की गई टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मामले में बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी समन और पूरी आपराधिक कार्यवाही को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने यह फैसला अभियोजन के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति नहीं होने के आधार पर सुनाया।
मामला राहुल गांधी की 17 नवंबर 2022 को भारत जोड़ो यात्रा के दौरान की गई टिप्पणी से जुड़ा था। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि सावरकर ने ब्रिटिश शासन के दौरान उनके साथ सक्रिय रूप से सहयोग किया था और उन्हें ब्रिटिश सरकार से पेंशन भी मिली थी। इन टिप्पणियों के बाद अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए और 505 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी की टिप्पणियों का उद्देश्य सावरकर के प्रति लोगों में घृणा और वैमनस्य पैदा करना था। शिकायत में यह भी कहा गया था कि महात्मा गांधी ने सावरकर को देशभक्त के रूप में मान्यता दी थी। हालांकि, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जून 2023 में शिकायत को खारिज कर दिया था।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने इस आदेश को चुनौती दी। वर्ष 2024 में लखनऊ की मजिस्ट्रेट अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी करते हुए टिप्पणी की थी कि उनके बयान से घृणा और वैमनस्य फैलने की संभावना है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए राहुल गांधी को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 397 के तहत सत्र न्यायालय का रुख करने की सलाह दी थी।
इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले निचली अदालत द्वारा जारी समन पर रोक लगाते हुए उनकी टिप्पणियों को बेहद गैर-जिम्मेदाराना बताया था और स्वतंत्रता सेनानियों के संबंध में आगे इस तरह की टिप्पणियां करने को लेकर सावधान किया था। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी उल्लेख किया था कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक बार सावरकर के प्रयासों की प्रशंसा की थी।
शुक्रवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने राहुल गांधी की याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के हलफनामे में अभियोजन के लिए आवश्यक अनुमति का कोई उल्लेख नहीं है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने कहा कि अभियोजन के लिए अनुमति आवश्यक है, लेकिन यहां ऐसी कोई अनुमति नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब आवश्यक अनुमति ही नहीं है तो मामले को आगे नहीं चलाया जा सकता और कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट ने आवश्यक वैधानिक अनुमति के अभाव को आधार बनाते हुए मजिस्ट्रेट अदालत के आदेशों को रद्द कर दिया। इसके साथ ही राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो गई। अदालत का फैसला मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी करने के बजाय अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया और अभियोजन के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति के अभाव के आधार पर आया है।
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