Viral News Live (बुलढाणा): महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में शिक्षा के क्षेत्र में आज एक बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां जिला प्रशासन और सरकार मुफ्त शिक्षा, स्कूल ड्रेस और मिड-डे मील पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिले के ग्रामीण और शहरी इलाकों के सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार कम हो रही है। बुलढाणा, चिखली, खामगांव और मलकापुर जैसे क्षेत्रों में छोटे-छोटे निजी स्कूलों की बाढ़ आ गई है, जो सरकारी व्यवस्था की विफलता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
बुलढाणा के अभिभावकों में भरोसे का संकट
यह समस्या केवल फीस की नहीं, बल्कि विश्वास की है। जिले के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी ढांचे की जर्जर हालत किसी से छिपी नहीं है। अभिभावकों के मन में यह धारणा घर कर चुकी है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर वह नहीं है, जो उनके बच्चों को प्रतियोगिता के इस दौर में आगे ले जा सके। यही कारण है कि खेती-मजदूरी करने वाले अभिभावक भी पेट काटकर अपने बच्चों का दाखिला निजी “इंग्लिश मीडियम” स्कूलों में करा रहे हैं।
’इंग्लिश मीडियम’ का मोह और छोटे निजी स्कूलों का जाल
बुलढाणा जिले के रिहायशी इलाकों और गांवों की तंग गलियों में खुले छोटे निजी स्कूल आज पहली पसंद बन रहे हैं। ये स्कूल भले ही पूरी तरह सुसज्जित न हों, लेकिन “अंग्रेजी शिक्षा” और “अनुशासन” का ऐसा माहौल पेश करते हैं, जो ग्रामीण अभिभावकों को आकर्षित करता है। उन्हें लगता है कि निजी स्कूल में उनके बच्चे का भविष्य अधिक सुरक्षित है, जबकि सरकारी स्कूल केवल ‘मिड-डे मील’ तक सीमित होकर रह गए हैं।
क्या केवल योजनाएं काफी हैं?
बुलढाणा की यह स्थिति दर्शाती है कि सिर्फ मुफ्त सुविधाएं देना ही पर्याप्त नहीं है। जब तक स्कूलों की छवि, पढ़ाई का स्तर और शिक्षकों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक खाली होते क्लासरूम को भरना मुश्किल होगा। जिले में शिक्षा विभाग को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन पर नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता (Quality of Education) में सुधार पर ध्यान देने की सख्त जरूरत है।
बदलाव की दरकार
स्थिति यह है कि जब तक सरकारी स्कूलों का स्तर निजी स्कूलों के समकक्ष नहीं होगा, तब तक यह विरोधाभास बना रहेगा। आज जरूरत इस बात की है कि बुलढाणा की शिक्षा व्यवस्था में केवल ढांचागत सुधार न हो, बल्कि एक ऐसा शैक्षिक माहौल बने जिससे आम आदमी का सरकारी तंत्र पर विश्वास फिर से बहाल हो सके।
