


बुलढाणा, 8 मार्च : भारतीय संविधान ने प्रत्येक नागरिक को जन्म से लेकर जीवन के अंतिम क्षण तक अनेक मौलिक अधिकार प्रदान किए हैं, किंतु जानकारी के अभाव में दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले अनेक नागरिक इन अधिकारों और विधिक सेवाओं से वंचित रह जाते हैं। इसलिए शासन की योजनाओं की तरह न्याय भी गांव-गांव तक पहुंचाना प्रत्येक शासकीय अधिकारी और जागरूक नागरिक का कर्तव्य है, ऐसा प्रतिपादन मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ के न्यायमूर्ति तथा पालक न्यायमूर्ति अनिल किलोर ने किया।
वे चिखली तहसील के अमडापुर स्थित श्री क्षेत्र बल्लालायी संस्थान परिसर में आयोजित ‘विधि सेवा महाशिविर एवं शासकीय योजनाओं के महामेले’ के उद्घाटन अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली तथा मुंबई उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जिला विधि सेवा प्राधिकरण, तालुका विधि सेवा समिति, चिखली तालुका वकील संघ और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। कार्यक्रम में मुंबई उच्च न्यायालय नागपुर खंडपीठ के न्यायाधीश तथा पालक न्यायमूर्ति एम.एम. नेरलीकर, प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश आर.एन. रोकडे, जिलाधिकारी डॉ. किरण पाटील, मुख्य कार्यकारी अधिकारी गुलाब खरात, पुलिस अधीक्षक निलेश तांबे, अमडापुर की सरपंच वैशाली गवई तथा श्री क्षेत्र बल्लालायी संस्थान के अध्यक्ष वल्लभराव देशमुख सहित अनेक मान्यवर उपस्थित थे।
न्यायमूर्ति अनिल किलोर ने आगे कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों तक शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से इस महामेले का आयोजन किया गया है। संविधान ने सभी नागरिकों को अनेक अधिकार प्रदान किए हैं, लेकिन अभी भी कई लोग न्याय की पहुंच से दूर हैं। ऐसे उपक्रमों के माध्यम से उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान का अवसर मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि शासकीय तंत्र को अपने-अपने विभागों की योजनाओं को प्रभावी ढंग से जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। इस सफल आयोजन के लिए उन्होंने प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश आर.एन. रोकडे, जिलाधिकारी डॉ. किरण पाटील और मुख्य कार्यकारी अधिकारी गुलाब खरात की सराहना की।
इस अवसर पर न्यायाधीश तथा पालक न्यायमूर्ति एम.एम. नेरलीकर ने कहा कि बुलढाणा जिले सहित राज्य के दूरदराज क्षेत्रों तक विधिक सेवाएं पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। कई बार मानव संसाधनों की कमी के कारण कठिनाइयां आती हैं, लेकिन ऐसे समय में स्थानीय स्तर पर कार्यरत शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को आगे बढ़कर पहल करनी चाहिए। प्रशासन को केवल नौकरी के रूप में नहीं बल्कि कर्तव्य भावना से काम करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक उसके अधिकार पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए। जब तक संविधान के अनुरूप न्याय समाज के अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचता, तब तक लोकतंत्र का उद्देश्य पूर्ण नहीं हो सकता।
जिलाधिकारी डॉ. किरण पाटील ने कहा कि एक समय ‘किसान आत्महत्या प्रभावित जिला’ के रूप में पहचाने जाने वाले बुलढाणा जिले ने अब विकास के क्षेत्र में पूरे राज्य का ध्यान आकर्षित किया है। हाल ही में प्रकाशित राज्य की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार जिले की विकास दर 22.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है और विकास की दौड़ में यह जिला राज्य में प्रथम स्थान पर आया है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर जिले की पुरानी छवि बदलने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। राज्य सरकार की ‘छत्रपति शिवाजी महाराज महसूल समाधान शिविर’ जैसी पहल के माध्यम से ग्रामीण स्तर तक शासकीय योजनाओं को पहुंचाया जा रहा है, जिससे आर्थिक या जानकारी के अभाव में विकास से दूर रहे लोगों को भी अवसर मिल रहा है।
प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश आर.एन. रोकडे ने कहा कि न्यायालय और कानून का उद्देश्य जनता की रक्षा करना है। पिछले एक वर्ष में जिला विधि सेवा प्राधिकरण और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से जिले में 3 हजार 663 मामलों का सफल निपटारा किया गया है। इस उपलब्धि के कारण बुलढाणा जिले ने राज्य में 11वां स्थान प्राप्त किया है और भविष्य में लोक अदालतों के माध्यम से शत-प्रतिशत मामलों के निपटारे का लक्ष्य रखा गया है।
महामेले में पात्र लाभार्थियों को श्रावण बाल योजना के प्रमाणपत्र, आयुष्मान भारत कार्ड, जाति एवं आय प्रमाणपत्र, नए राशन कार्ड और अन्य शासकीय सनदें वितरित की गईं। इसके साथ ही शासकीय भूमि पर रहने वाले नागरिकों के अतिक्रमण को नियमानुसार वैध कर उन्हें पट्टे प्रदान किए गए। बचत समूहों को ‘बलिराजा समूह खेती योजना’ के अंतर्गत प्रतीकात्मक धनादेश भी मान्यवरों के हाथों प्रदान किए गए। इस अवसर पर विभिन्न शासकीय विभागों के लगभग 50 स्टॉल लगाए गए थे, जहां नागरिकों को योजनाओं की जानकारी और मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम के अंत में मान्यवरों ने सभी स्टॉलों का दौरा कर संबंधित अधिकारियों से संवाद करते हुए योजनाओं की जानकारी ली।
कार्यक्रम की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बालिकाओं द्वारा मान्यवरों के स्वागत से हुई। इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए तालुका विधि सेवा समिति की अध्यक्ष स्मिता उके, जिला विधि सेवा समिति के सचिव नितिन पाटील तथा चिखली तालुका वकील संघ के अध्यक्ष सतीश गवई ने विशेष प्रयास किए। कार्यक्रम का संचालन मंदार पांडे ने किया जबकि आभार प्रदर्शन नितिन पाटील ने किया। इस अवसर पर जिले के न्यायिक एवं शासकीय अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।





