New Labour Codes: 1 अप्रैल से होंगे लागू, सरकार जल्द प्री-पब्लिश करेगी मसौदा, जानें क्या होगा बदलाव | New Labour Codes Implementation From 1st April Draft Pre Publish Changes News in Hindi
New Labour Codes: सरकार ने श्रम सुधारों की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए चार नए लेबर कोड लागू करने की तैयारी कर ली है। श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि ये संहिताएं अगले वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएंगी। इसके लिए ड्राफ्ट नियमों को जल्द ही जनता के सामने रखा जाएगा और लोगों को सुझाव देने के लिए 5 दिन का समय मिलेगा। उसके बाद फाइनल अधिसूचना जारी की जाएगी।

चार प्रमुख श्रम कोड
चारों श्रम कोडों को एक नई रूपरेखा में लाया गया है, जिससे पुराने 29 कानूनों का एकीकरण हो गया है। ये कोड हैं:
कोड ऑन वेजेस 2019
इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020
कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020
ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड 2020
इन कोडों के लागू होने से कर्मचारियों के अधिकार साफ होंगे और कानूनों का पालन करना आसान होगा।
काम का समय और ओवरटाइम
मनसुख मांडविया ने कहा कि नई संहिताओं के अनुसार कर्मचारियों के लिए 8 घंटे प्रतिदिन काम करना अनिवार्य रहेगा। इसके अलावा, कर्मचारियों को ओवरटाइम का विकल्प भी मिलेगा। यह कदम कर्मचारियों को अधिक कमाई का अवसर देगा और कार्य का समय नियंत्रित रखने में मदद करेगा।
ग्रेच्युटी में बदलाव
नई संहिताओं में ग्रेच्युटी नियमों में भी सुधार किया गया है। अब कर्मचारी सिर्फ 1 साल काम करने के बाद ग्रेच्युटी का लाभ ले सकते हैं, जबकि पहले यह अवधि 5 साल थी। इसके अलावा, टैक्स-फ्री ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख कर दी गई है।
एम्प्लॉयर को ग्रेच्युटी 30 दिनों के अंदर भुगतान करना होगा। अगर भुगतान में देरी होती है, तो 10% सालाना ब्याज और अधिकतम दोगुना जुर्माना लगाया जा सकता है। यह नियम प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर दोनों पर लागू होगा। उदाहरण के लिए, 5 साल काम करने वाले कर्मचारी को हर साल 15 दिन का वेज मिलेगा।
राज्यों की भूमिका
चूंकि श्रम कानून सह-विषय हैं, राज्यों को भी अपने स्तर पर इन्हें लागू करना होगा। नियमों के मसौदे को जनता की प्रतिक्रिया के लिए 45 दिन तक रखा जाएगा। इसके बाद ही फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।
इन नए श्रम कोडों के लागू होने से कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा बढ़ेगी, काम के घंटे नियंत्रित रहेंगे और ग्रेच्युटी का फायदा आसान और टैक्स-फ्री मिलेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम भारतीय श्रमिकों के अधिकारों और उनके कल्याण के लिए अहम साबित होगा।
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