IND-PAK: क्यों नहीं कर सकता पाकिस्तान न्यूक्लियर बम्ब का इस्तेमाल, जानें क्या है गैर-परमाणु आक्रमण समझौता | IND-PAK: What is Non-Nuclear Aggression Agreement? Know why Pakistan cannot use Parmanu Bomb

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IND-PAK: क्यों नहीं कर सकता पाकिस्तान न्यूक्लियर बम्ब का इस्तेमाल, जानें क्या है गैर-परमाणु आक्रमण समझौता | IND-PAK: What is Non-Nuclear Aggression Agreement? Know why Pakistan cannot use Parmanu Bomb

What is Non-Nuclear Aggression Agreement? भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं। हालांकि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद और समझौते भी समय-समय पर होते रहे हैं, जिनका उद्देश्य क्षेत्र में शांति बनाए रखना है।

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IND-PAK: जानिए क्या है गैर-परमाणु आक्रमण समझौता

चित्र: प्रतिकात्मक

ऐसा ही एक महत्वपूर्ण समझौता है- “गैर-परमाणु आक्रमण समझौता” (Non-Nuclear Aggression Agreement) जो दोनों देशों के परमाणु प्रतिष्ठानों की रक्षा सुनिश्चित करता है। मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति, भारत-पाक संबंधों में बढ़ते तनाव और पाकिस्तान की परमाणु धमकियों के बीच, यह समझौता एक बार फिर चर्चा में है।

क्या है गैर-परमाणु आक्रमण समझौता?

भारत और पाकिस्तान के बीच गैर-परमाणु आक्रमण समझौता 31 दिसंबर 1988 को हस्ताक्षरित हुआ और जनवरी 1991 से प्रभावी हुआ। इस समझौते के तहत, दोनों देश सहमत हुए कि वे एक-दूसरे के परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं पर हमला नहीं करेंगे।

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य है दोनों देशों के बीच परमाणु हमले की आशंका को खत्म करना और रणनीतिक स्थिरता को बनाए रखना। यह विशेष रूप से ऐसे समय में और महत्वपूर्ण हो जाता है जब सीमा पर हालात तनावपूर्ण हों, और युद्ध की आशंका प्रबल हो।

हर साल होती है परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान

इस समझौते के अनुसार, भारत और पाकिस्तान हर साल 1 जनवरी को एक-दूसरे को अपनी-अपनी परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची सौंपते हैं। यह प्रक्रिया 1992 से बिना किसी रुकावट के अब तक जारी है, यहां तक कि जब 1999 का कारगिल युद्ध या 2001 में संसद हमले जैसे बड़े सैन्य टकराव हुए, तब भी यह आदान-प्रदान होता रहा।

इसका मकसद स्पष्ट है कि पारदर्शिता और विश्वास को बनाए रखना, ताकि गलती से या जानबूझ कर परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने जैसी घटनाओं से बचा जा सके।

क्या पाकिस्तान कर सकता है न्यूक्लियर बम का इस्तेमाल?

तकनीकी रूप से देखें तो कोई भी देश अपनी सैन्य रणनीति में परिवर्तन कर सकता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नियम, द्विपक्षीय समझौते और वैश्विक दबाव पाकिस्तान जैसे देश को परमाणु हथियार के उपयोग से रोकते हैं। भारत और पाकिस्तान दोनों ही एनपीटी (Nuclear Non-Proliferation Treaty) पर हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं, लेकिन भारत ने ‘No First Use’ नीति को अपनाया है, जबकि पाकिस्तान की नीति अस्पष्ट रही है।

हालांकि पाकिस्तान अकसर परमाणु हमले की धमकी देता है, लेकिन वह गैर-परमाणु आक्रमण समझौते के कारण प्रत्यक्ष हमला करने से बचता है। इसके अतिरिक्त, यदि पाकिस्तान परमाणु हथियार का प्रयोग करता है, तो उसे न केवल भारत की जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अलग-थलग पड़ जाएगा।

मौजूदा परिप्रेक्ष्य और यूपीएससी छात्रों के लिए गैर-परमाणु आक्रमण समझौता का महत्त्व

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 28 पर्यटकों की दुखद मृत्यु हुई, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-पाकिस्तान के बीच 1960 में हुए सिंधु जल संधि को निरस्त कर दिया। इस कदम से दोनों देशों के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया और पाकिस्तान के कई प्रमुख नेता परमाणु की धमकी देने पर ऊतर आए हैं। जिस कारण से गैर-परमाणु आक्रमण समझौता एक बार फिर से चर्चा का ट्रेंडिंग विषय बन गया है।

दरअसल, यूपीएससी जैसे परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों, सुरक्षा रणनीति, रक्षा नीति और विदेश नीति जैसे विषयों से सीधे जुड़ा है।

मुख्य बिंदु जो छात्रों को समझने चाहिए:

• भारत और पाकिस्तान के बीच हुए प्रमुख द्विपक्षीय समझौते

• परमाणु नीति और ‘No First Use’ सिद्धांत की समझ

• दक्षिण एशिया में परमाणु शक्ति संतुलन

• अंतरराष्ट्रीय कानूनों और कूटनीतिक दबावों की भूमिका

• भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और सुरक्षा नीति

नोट- यह आर्टिकल मात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्नों को ध्यान में रखते हुए लिखा गया है।

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