मलकापुर : AIMIM की जबरदस्त पहल: शहर की सीमा बढ़ाने पर शुरू हुई मुहिम, अब निगाहें नगराध्यक्ष पर

मलकापुर : AIMIM की जबरदस्त पहल: शहर की सीमा बढ़ाने पर शुरू हुई मुहिम, अब निगाहें नगराध्यक्ष पर
मलकापुर : AIMIM की जबरदस्त पहल: शहर की सीमा बढ़ाने पर शुरू हुई मुहिम, अब निगाहें नगराध्यक्ष पर
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दिनांक 2 जनवरी 2026, शुक्रवार को AIMIM मलकापुर शहर की ओर से मलकापुर की अवाम से किए गए चुनावी वादों को अमल में लाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया। पार्टी ने चुनाव के समय जनता से यह भरोसा दिलाया था कि जैसे ही AIMIM के प्रतिनिधि काउंसिल में पहुंचेंगे, शहर की सीमा से बाहर पड़ी बस्तियों को नगर पालिका की हद में शामिल कराने का प्रस्ताव सबसे पहले लाया जाएगा।

इसी वादे के तहत बाबा मुश्ताक अली नगर, फिरदौस कॉलोनी, नूर मोहम्मद कॉलोनी, मूसा कॉलोनी, हाशमी नगर, फातिमा नगर सहित कई बस्तियों — जो अब तक नगर पालिका की सुविधाओं से बाहर हैं — को मलकापुर नगर पालिका की सीमा में शामिल करने को लेकर एक आधिकारिक मेमो तैयार कर नगराध्यक्ष को सौंपा गया। यह मेमो प्रभाग क्रमांक 9-अ की नगरसेविका शकीला बी असादुल्लाह शाह और प्रभाग क्रमांक 8 की नगरसेविका अस्मत अंजुम अब्दुल कहार के लेटरहेड पर जारी किया गया।

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यह पहल AIMIM बुलढाणा जिलाध्यक्ष दानिश शेख और शहराध्यक्ष एड. इमरान राशिद खान के नेतृत्व में हुई। इस दौरान सिद्दीक शाह, अब्दुल कहार (ठेकेदार), शेख मुबाशिर (बबलू भाई), शेख शोएब सहित AIMIM के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

इस पूरी प्रक्रिया के बीच अब चर्चा का बड़ा विषय नगराध्यक्ष पर भी आ टिका है — जो कांग्रेस पार्टी से हैं। चुनाव से पहले नगराध्यक्ष ने जनता के सामने यह कहते हुए भरोसा दिलाया था कि:

“हम वादे नहीं, इरादे लेकर आए हैं… क्योंकि वादे टूट जाते हैं — इरादे नहीं।”

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब AIMIM ने अपना वादा निभाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है, तो क्या नगराध्यक्ष अपने “इरादों” को ज़मीन पर उतारने के लिए उसी तेजी से आगे आएंगे? क्या शहर की सीमा बढ़ाकर उन बस्तियों को भी मुख्यधारा में जोड़ा जाएगा, जिन्हें वर्षों से मूलभूत सुविधाओं का इंतज़ार है?

AIMIM ने साफ़ कहा है कि पार्टी जनता से किए गए हर वादे को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है और शहर के विकास, सड़क-बिजली-पानी, स्वास्थ्य व नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे काउंसिल में मजबूती से उठाए जाएंगे।

अब देखना यह है कि नगर पालिका प्रशासन और नगराध्यक्ष इस प्रस्ताव को कितनी गंभीरता से लेते हैं — और क्या सच में “वादों” की जगह “इरादे” सामने आते हैं।

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