Bhopal
oi-Laxminarayan Malviya
मध्य
प्रदेश
के
दतिया
जिले
के
इंदरगढ़
में
आजाद
समाज
पार्टी
(कांशीराम)
की
‘संविधान
बचाओ
रैली’
न
केवल
डॉ.
भीमराव
आंबेडकर
के
महापरिनिर्वाण
दिवस
का
प्रतीक
बनेगी,
बल्कि
उत्तर
प्रदेश
(2027)
और
मध्य
प्रदेश
(2028)
की
राजनीति
में
एक
नया
मोड़
ला
सकती
है।
नागिना
सांसद
और
पार्टी
के
राष्ट्रीय
अध्यक्ष
चंद्रशेखर
आजाद
‘रावण’
तथा
दलित-पिछड़ा
नेता
दामोदर
सिंह
यादव
के
नेतृत्व
में
यह
रैली
आडंबर-पाखंड
के
खिलाफ
हुंकार
भरेगी
और
OBC
वर्ग
के
27%
आरक्षण
को
मजबूत
करने
का
संकल्प
लेगी।

ग्वालियर-चंबल
क्षेत्र
में
दलित,
पिछड़ा
और
आदिवासी
वोट
(करीब
35-40%)
को
एकजुट
करने
का
यह
प्रयास
भाजपा-कांग्रेस
दोनों
के
लिए
चुनौती
है,
लेकिन
विश्लेषकों
का
मानना
है
कि
इसका
सबसे
बड़ा
नुकसान
कांग्रेस
को
होगा।
2023
विधानसभा
चुनाव
में
इसी
क्षेत्र
से
कांग्रेस
को
अप्रत्याशित
फायदा
हुआ
था,
जिससे
उसकी
कुल
66
सीटें
बनीं।
रैली
में
1
लाख
से
अधिक
लोगों
के
पहुंचने
की
उम्मीद
है,
जो
बहुजन
समाज
को
एक
मंच
पर
लाएगी।
चंद्रशेखर
आजाद
ने
ग्वालियर
से
हेलीकॉप्टर
में
दामोदर
सिंह
यादव
को
रिसीव
कर
इंदरगढ़
पहुंचने
का
नजारा
देखकर
कार्यकर्ताओं
में
जोश
की
लहर
दौड़
गई।
लेकिन
सवाल
यही
है
–
यह
रैली
तीसरे
विकल्प
के
रूप
में
उभरकर
किसकी
नींद
उड़ाएगी?
वनइंडिया
हिंदी
की
विशेष
रिपोर्ट
में
जानिए
रैली
का
महत्व,
जातिगत
समीकरण
और
चुनावी
असर।
इंदरगढ़
रैली
क्यों
खास?
संविधान
बचाओ
का
नया
अध्याय,
बहुजन
एकता
का
प्रतीक
इंदरगढ़
रैली
आजाद
समाज
पार्टी
का
मध्य
प्रदेश
में
अब
तक
का
सबसे
बड़ा
शक्ति
प्रदर्शन
है।
डॉ.
आंबेडकर
के
महापरिनिर्वाण
दिवस
पर
आयोजित
यह
सभा
संविधान
के
मूल्यों
–
समानता
(अनुच्छेद
14),
भेदभाव
निषेध
(अनुच्छेद
15)
और
छुआछूत
उन्मूलन
(अनुच्छेद
17)
–
की
रक्षा
का
ऐलान
करेगी।
मुख्य
निशाना
बागेश्वर
धाम
के
धीरेंद्र
शास्त्री,
पंडित
प्रदीप
मिश्रा
और
जगद्गुरु
रामभद्राचार्य
जैसे
कथावाचकों
के
कथित
“पाखंड
और
जातिवादी
बयानों”
पर
है।
चंद्रशेखर
आजाद
ने
कहा,
“यह
रैली
संविधान
बचाने
का
संकल्प
है।
बहुजन
समाज
(दलित
18%,
OBC
45%,
ST
7%)
को
एकजुट
कर
2027-28
चुनावों
में
तीसरा
विकल्प
बनाएंगे।”
दामोदर
सिंह
यादव
ने
जोर
दिया,
“OBC
के
27%
आरक्षण
को
मजबूत
करना
हमारा
लक्ष्य।
इंदरगढ़
से
बुंदेलखंड
तक
हुंकार
गूंजेगी।”
रैली
का
महत्व:
-
–
बहुजन
एकता:
दलित-पिछड़ा-अनुसूचित
जनजाति
वोट
को
एक
मंच। -
–
क्षेत्रीय
असर:
दतिया-ग्वालियर-चंबल
से
बुंदेलखंड
(UP)
तक
प्रभाव। -
–
राजनीतिक
मोड़:
BSP
के
बाद
ASP
का
उभार,
जो
सपा-कांग्रेस
को
चुनौती
देगा।
रैली
आज
दोपहर
12
बजे
शुरू
होगी
है,
जिसमें
1
लाख
से
अधिक
लोग
जुटने
का
दावा
हैं।
चंद्रशेखर
आजाद
और
दामोदर
सिंह
यादव
हेलीकॉप्टर
से
पहुंचेंगे,
जिसने
उत्साह
दोगुना
कर
दिया
है।
ग्वालियर-चंबल
के
जातिगत
समीकरण:
दलित-OBC-ST
वोट
निर्णायक,
2023
में
कांग्रेस
को
फायदा
-
ग्वालियर-चंबल
क्षेत्र
(दतिया,
ग्वालियर,
भिंड,
मुरैना,
श्योपुर,
अशोकनगर)
में
वोटिंग
पैटर्न
जाति
पर
आधारित
है।
कुल
वोटर:
करीब
1.5
करोड़।
जातिगत
ब्रेकडाउन: -
–
दलित
(SC):
18-20%
(जाटव,
बलाही,
खटिक)। -
–
पिछड़ा
(OBC):
45%
(कुर्मी,
गुर्जर,
किरार,
लोधी,
सैनी)। -
–
आदिवासी
(ST):
7-8%
(साहारीया,
भील)। -
–
सवर्ण:
20%
(ब्राह्मण,
राजपूत,
बनिया)। -
–
मुस्लिम:
10%।

2023
विधानसभा
चुनाव
में
इस
क्षेत्र
से
कांग्रेस
को
20
से
अधिक
सीटें
मिलीं,
जो
राज्य
स्तर
पर
उसकी
66
सीटों
का
आधार
बनीं।
कारण:
OBC-ST
वोट
का
ध्रुवीकरण।
भाजपा
को
सवर्ण
और
कुछ
OBC
वोट
मिले,
लेकिन
बहुजन
गठबंधन
ने
कांग्रेस
को
फायदा
दिया।
ASP
का
उभार
बहुजन
वोट
को
तोड़
सकता
है,
जो
कांग्रेस
के
लिए
खतरे
की
घंटी
है।
विश्लेषक
डॉ
ने
कहा,
“2023
में
कांग्रेस
ने
OBC-ST
वोट
से
चंबल
में
70%
सीटें
जीतीं।
ASP
अगर
10-15%
बहुजन
वोट
ले
ले,
तो
कांग्रेस
की
20
सीटें
खतरे
में।
भाजपा
का
कोर
वोट
(सवर्ण)
सुरक्षित,
लेकिन
OBC
में
सेंध
लग
सकती
है।”
-
किसका
होगा
नुकसान?
कांग्रेस
को
भारी,
भाजपा
पर
सीमित
असर
–
2027-28
चुनावों
पर
बड़ा
धमाका -
रैली
का
असर
UP
2027
और
MP
2028
चुनावों
पर
पड़ेगा।
बुंदेलखंड
(झांसी,
ललितपुर,
हमीरपुर)
में
भी
बहुजन
वोट
प्रभावित
होगा।
कांग्रेस
को
नुकसान:
-
–
2023
में
चंबल-ग्वालियर
से
25+
सीटें
जीतीं,
जहां
बहुजन
वोट
निर्णायक
था। -
–
ASP
का
तीसरा
विकल्प
बनना
OBC-ST
वोट
तोड़ेगा,
जो
कांग्रेस
का
बेस
था। -
–
कमलनाथ-जितू
पटवारी
की
स्ट्रैटेजी
पर
सवाल।
कांग्रेस
को
10-15%
वोट
लॉस
हो
सकता
है।
भाजपा
पर
असर:
-
सवर्ण-मुस्लिम
वोट
मजबूत,
लेकिन
OBC
में
सेंध
(कुर्मी-गुर्जर)। -
ASP
से
5-7%
नुकसान,
लेकिन
संगठन
मजबूत
होने
से
सीमित। -
शिवराज
सिंह
चौहान
का
प्रभाव
OBC
में
बरकरार,
लेकिन
युवा
बहुजन
ASP
की
ओर।
तीसरा
विकल्प
का
फायदा:
ASP
को
10-15
सीटें,
जो
सपा-BSP
को
भी
प्रभावित
करेगा।
UP
2027
में
बुंदेलखंड
की
20+
सीटें
प्रभावित।
इंदरगढ़
से
बहुजन
क्रांति
की
शुरुआत,
कांग्रेस
की
नींद
उड़ेगी
इंदरगढ़
रैली
बहुजन
एकता
का
नया
अध्याय
लिखेगी।
चंद्रशेखर
आजाद
और
दामोदर
सिंह
यादव
की
जोड़ी
OBC-ST
वोट
को
एकजुट
कर
कांग्रेस
को
सबसे
ज्यादा
नुकसान
पहुंचाएगी।
भाजपा
सतर्क,
लेकिन
इसका
फायदा
ASP
को।
2027-28
चुनावों
में
तीसरा
विकल्प
उभरेगा।
वनइंडिया
हिंदी
रैली
की
लाइव
कवरेज
करेगा।
क्या
ASP
तीसरा
फ्रंट
बनेगा?
कमेंट
में
बताएं।
(
ब्यूरो
रिपोर्ट:
वनइंडिया
हिंदी,
एलएन
मालवीय
)
-

गुजरात के जामनगर में गोपाल इटालिया पर जूता फेंका, AAP ने कहा – ‘BJP-कांग्रेस दोनों घबराए हुए हैं’
-

MP News: मध्य प्रदेश द्वितीय अनुपूरक बजट 2025, पीएम आवास योजना के लिए 4,000 करोड़ का प्रावधान
-

मां के बाद अब पिता भी चले गए, अकेली पड़ गईं बांसुरी स्वराज, 41 की उम्र में भी क्यों नहीं की अब तक शादी?
-

सुषमा स्वराज के पति और BJP सांसद बांसुरी स्वराज के पिता स्वराज कौशल का निधन, रह चुके हैं मिजोरम के राज्यपाल
-

Swaraj Kaushal Caste: किस जाति के थे सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल? परिवार में कौन-कौन? पढ़ें सफरनामा
-

Kal Ka Match Kon Jeeta 3 Dec: कल का मैच कौन जीता- भारत vs साउथ अफ्रीका
-

‘हेमा मालिनी ने औरत होकर मेरे साथ जो किया’, धर्मेंद्र की पहली पत्नी प्रकाश कौर का शॉकिंग बयान, सामने आया सच
-

धर्मेंद्र की पंजाब की प्रॉपर्टी को लेकर बड़ा खुलासा, सनी-बॉबी को मिला ‘0’, किसको सौंप दी सारी जमीन?
-

Swaraj Kaushal Death Reason: किस वजह से हुई सुषमा स्वराज के पति कौशल स्वराज का निधन? एम्स ले जाते ही टूटी सांस
-

Swaraj Kaushal Death: पहले गईं Sushma, अब पति स्वराज ने कहा अलविदा, दिल दहलाने वाली निधन की ये समानताएं
-

Bengaluru weather: बेंगलुरू में कब कम होगी ठंड, क्या होगी बारिश? IMD ने जारी किया अलर्ट
-

धर्मेंद्र के निधन बाद हेमा मालिनी की जिंदगी का हुआ सबसे बड़ा खुलासा, क्यों करनी पड़ी थी बी-ग्रेड फिल्म?





