ELSS vs Index Mutual Funds: कहां मिलेगा मोटा रिटर्न! निवेशकों को कौन-सा चुनना चाहिए और क्यों? | ELSS Vs Index Mutual Funds Where Will Get Investors Beneficiary And Why Know Return History And Difference
ELSS vs Index Mutual Funds: आज के समय में निवेश के कई विकल्प हैं, लेकिन उनमें से शेयर मार्केट और म्यूचुअल फंड्स के स्कीम में निवेश करना लोग ज्यादा प्रीफर कर रहे हैं। म्यूचुअल फंड के स्कीम्स में ज्यादा से ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना अधिक होती है।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के डेटा के अनुसार, इंडेक्स म्यूचुअल फंड कहीं ज़्यादा पॉपुलर हैं, जिनकी कुल 345 स्कीम हैं और उनके एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹3.20 लाख करोड़ हैं, जबकि पूरे म्यूचुअल फंड यूनिवर्स में ELSS म्यूचुअल फंड की संख्या 42 है, जिनके कुल एसेट ₹2.53 लाख करोड़ हैं।

आज हम आपको यहां पर ELSS (Equity Linked Savings Scheme) और Index Mutual Funds के बारे में बता रहे हैं। तो आइए जानते हैं कि दोनों में क्या अंतर है और कहां पिछले कुछ सालों के रिटर्न हिस्ट्री के हिसाब से समझते हैं कि कौनसा ऑप्शन ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है…
ELSS vs Index Mutual Funds में अतंर
यदि पिछले कुछ सालों के रिटर्न हिस्ट्री को देखें तो दोनों ही इक्विटी-आधारित निवेश विकल्प हैं और इनमें लंबे समय में अच्छा रिटर्न देने की पूरी संभावना है, लेकिन इनमें कई अंतर हैं।
| पैरामीटर | ELSS Funds | Index Mutual Funds |
| मैनेजमेंट स्टाइल | एक्टिव मैनेजमेंट: फंड मैनेजर स्टॉक्स चुनते हैं, बड़े, मिड और स्मॉल कैप में निवेश। | पैसिव मैनेजमेंट: Nifty 50, Sensex या अन्य इंडेक्स को ट्रैक करते हैं, कोई एक्टिव चयन नहीं। |
| टैक्स बेनिफिट | सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक डिडक्शन, टैक्स सेविंग्स ₹46,800 तक (उच्चतम ब्रैकेट में)। लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर 10% टैक्स (₹1 लाख से ऊपर)। | कोई upfront टैक्स डिडक्शन नहीं। लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर 10% टैक्स (₹1 लाख से ऊपर)। |
| लॉक-इन पीरियड | 3 साल (प्रत्येक SIP इंस्टॉलमेंट पर लागू), टैक्स-सेविंग ऑप्शंस में सबसे कम। | कोई लॉक-इन नहीं, कभी भी रिडीम कर सकते हैं। |
| जोखिम | हाई (एक्टिव स्ट्रैटजी से, मार्केट वोलेटिलिटी ज्यादा प्रभावित करती है)। | मीडियम से हाई (इंडेक्स पर निर्भर, जैसे मिडकैप इंडेक्स ज्यादा वोलेटाइल)। |
| लागत (एक्सपेंस रेशियो) | ज्यादा (एक्टिव मैनेजमेंट की वजह से, 1-2% तक)। | कम (पैसिव की वजह से, 0.2-0.5% तक)। |
| लिक्विडिटी | कम (3 साल तक पैसे निकाल नहीं सकते)। | हाई (कभी भी निकाल सकते हैं)। |
रिटर्न की तुलना
ELSS Funds: एक्टिव मैनेजमेंट की वजह से पोटेंशियल हाई रिटर्न, लेकिन परफॉर्मेंस फंड मैनेजर पर निर्भर। 2025 के डेटा से टॉप ELSS फंड्स के औसत रिटर्न:1-साल: 7-16% (औसत ~13%)
- 3-साल: 11-16% (औसत ~14%)
- 5-साल: 13-19% (औसत ~18%)
- उदाहरण: HDFC ELSS Tax Saver Fund (5-ईयर: 18.80%), SBI ELSS Tax Saver Fund (5-ईयर: 18.72%)।
- लंबे समय में (10 साल) औसत ~13.61%।
- टॉप परफॉर्मर्स जैसे Quant ELSS Tax Saver Fund ने 5-सालमें ~28-29% दिए हैं।
Index Mutual Funds: मार्केट को ट्रैक करते हैं, इसलिए कंसिस्टेंट लेकिन एक्टिव से कम हाई रिटर्न। 2025 के टॉप इंडेक्स फंड्स (ज्यादातर मिड/स्मॉल कैप):
- 3-साल: 15-21% (टॉप जैसे Motilal Oswal Nifty Midcap 150: 21.24%)
- 1-साल: 13-22% (टॉप जैसे Edelweiss US Technology: 22.49%)
- 5-साल: उपलब्ध डेटा में कम (जैसे UTI Nifty 50: 4.26%, लेकिन लार्ज कैप इंडेक्स हिस्टोरिकली 14-16% देते हैं)।
- उदाहरण: UTI Nifty 50 Index Fund (3-साल: 14.24%), ICICI Prudential Nifty Next 50 (3-साल: 13.96%)।
- लार्ज कैप इंडेक्स (Nifty 50) के रिटर्न आमतौर पर 12-15% लॉन्ग-टर्म में रहते हैं, जबकि मिडकैप ज्यादा (लेकिन रिस्की)।
कहां मिलेगा मोटा रिटर्न?
ELSS में पोटेंशियल ज्यादा है क्योंकि एक्टिव मैनेजमेंट से आउटपरफॉर्म कर सकते हैं (जैसे कुछ फंड्स 20%+ 5-ईयर), लेकिन इंडेक्स फंड्स कंसिस्टेंट और कम लागत वाले होते हैं। अगर मार्केट बुल में हैं, तो ELSS बेहतर, लेकिन बेयर में इंडेक्स सेफ। कुल मिलाकर, लॉन्ग-टर्म (5+ साल) में दोनों 12-20% रेंज में दे सकते हैं, लेकिन ELSS का टैक्स बेनिफिट कंपाउंडिंग बढ़ाता है।
निवेशकों को कौन-सा चुनना चाहिए और क्यों?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि दोनों इन्वेस्टमेंट ऑप्शन सही हैं, क्योंकि वे इक्विटी में इन्वेस्ट करके लंबे समय में पैसा बनाते हैं। हालांकि, इन्वेस्टर की अपनी ज़रूरतों और पसंद के आधार पर कोई एक दूसरे से बेहतर हो सकता है।
सेबी-रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और अपना धन फाइनेंशियल सर्विसेज़ की फाउंडर प्रीति ज़ेंडे का मानना है कि इनमें से किसी एक को चुनना इन्वेस्टर के इमोशनल बिहेवियर पर निर्भर करता है।
वह कहती हैं, “ELSS और इंडेक्स फंड दोनों ही इक्विटी म्यूचुअल फंड हैं जो लंबे समय में पैसा बनाने में मदद करते हैं। लेकिन ELSS उन लोगों के लिए बेहतर कंपाउंडिंग बेनिफिट दे सकता है जो इंपल्सिव नेचर के होते हैं — यानी, जो डर और लालच जैसी दो इंसानी भावनाओं में बह जाते हैं। आमतौर पर इक्विटी फंड में लंबे समय के लिए (कम से कम 10 साल) इन्वेस्ट करने की सलाह दी जाती है।”
ELSS चुनें अगर:
- आपको टैक्स सेविंग चाहिए (80C लिमिट यूज करने के लिए)।
- आप 3 साल का लॉक-इन सहन कर सकते हैं (यह अनुशासन लाता है, वोलेटिलिटी से बचाता है)।
- लॉन्ग-टर्म गोल्स (5-10 साल) जैसे रिटायरमेंट या एजुकेशन के लिए, जहां हाई ग्रोथ चाहिए।
- क्यों? टैक्स बेनिफिट से नेट रिटर्न बढ़ता है, और एक्टिव मैनेजमेंट से मार्केट बीट करने का चांस। SIP से शुरू करें।
Index Funds चुनें अगर:
- आपको लिक्विडिटी चाहिए (कभी भी पैसे निकालने की फ्लेक्सिबिलिटी)।
- कम लागत और सिंपल निवेश पसंद है, बिना फंड मैनेजर रिस्क के।
- मार्केट ट्रैकिंग से संतुष्ट हैं, बिना टैक्स सेविंग की जरूरत।
- क्यों? कम फीस से लॉन्ग-टर्म में बेहतर कंपाउंडिंग, और पैसिव अप्रोच से कंसिस्टेंट रिटर्न। शुरुआती निवेशकों के लिए आइडियल।
दोनों का कॉम्बिनेशन: कई निवेशक ELSS से 80C मैक्सिमाइज करते हैं, फिर सरप्लस को इंडेक्स फंड्स में डालते हैं। रिस्क प्रोफाइल चेक करें – हाई रिस्क के लिए ELSS/मिडकैप इंडेक्स, लो रिस्क के लिए लार्ज कैप इंडेक्स। हमेशा फाइनेंशियल एडवाइजर से कंसल्ट करें और डाइवर्सिफाई करें।
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