Indigo Flight Cancellation: इंडिगो क्राइसिस पर PMO हुई सख्त, CEO ने हाथ जोड़कर क्या कहा? | indigo crisis pmo monitoring ceo peter elbers seeks 10 days fdtl penalty risk

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Indigo Flight Cancellation: इंडिगो क्राइसिस पर PMO हुई सख्त, CEO ने हाथ जोड़कर क्या कहा? | indigo crisis pmo monitoring ceo peter elbers seeks 10 days fdtl penalty risk

India

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oi-Sumit Jha


Indigo
Crisis
PMO
Action:

इंडिगो
एयरलाइंस
के
सैकड़ों
विमानों
के
रद्द
होने
से
पिछले
पाँच
दिनों
से
देश
का
हवाई
यातायात
पूरी
तरह
चरमरा
गया
है,
जिससे
बाज़ार
की
60%
हिस्सेदारी
वाली
कंपनी
पर
गंभीर
संकट

गया
है।
इस
गंभीर
अव्यवस्था
के
बाद,
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
को
पूरे
मामले
की
जानकारी
दी
गई
है
और
PMO
ने
अब
सीधे
हस्तक्षेप
कर
CEO
पीटर
एल्बर्स
को
तुरंत
व्यवस्था
सामान्य
करने
का
सख्त
निर्देश
दिया
है।

एल्बर्स
ने
नेटवर्क
को
स्थिर
करने
के
लिए
दस
दिनों
की
मोहलत
मांगी
है,
लेकिन
सरकार
ने
स्पष्ट
कर
दिया
है
कि
नियामक
ढिलाई
मिलने
पर
कंपनी
पर
भारी
पेनल्टी
लगाई
जाएगी,
क्योंकि
यात्रियों
की
परेशानी
खत्म
करना
ही
सरकार
की
सर्वोच्च
प्राथमिकता
है।

Indigo Crisis PMO Action

PMO
की
सीधी
निगरानी
और
सरकार
का
सख्त
संदेश

इंडिगो
के
परिचालन
संकट
पर
अब
प्रधानमंत्री
कार्यालय
(PMO)
ने
सीधी
नजर
रखनी
शुरू
कर
दी
है।
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
को
स्थिति
की
विस्तृत
जानकारी
दी
गई
है,
और
PMO
लगातार
इंडिगो
के
CEO
पीटर
एल्बर्स
के
साथ
संवाद
में
है।
सरकार
ने
एयरलाइन
को
स्पष्ट
संदेश
दिया
है
कि
उड़ान
व्यवस्था
को
जल्द
से
जल्द
सामान्य
किया
जाए।
यह
उच्चतम
स्तर
का
हस्तक्षेप
दर्शाता
है
कि
सरकार
यात्रियों
की
परेशानी
और
राष्ट्रीय
विमानन
नेटवर्क
के
इस
संकट
को
कितनी
गंभीरता
से
ले
रही
है।
PMO
की
मॉनिटरिंग
से
एयरलाइन
पर
त्वरित
सुधार
का
दबाव
बढ़ा
है।


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का
मैक्सिमम
फेयर


नेटवर्क
स्थिरता
के
लिए
इंडिगो
ने
मांगी
मोहलत

सरकारी
सख्ती
के
बाद
इंडिगो
प्रबंधन
ने
सरकार
से
करीब
दस
दिनों
की
मोहलत
मांगी
है।
CEO
पीटर
एल्बर्स
का
तर्क
है
कि
इस
समयसीमा
के
भीतर
वे
चरमराई
हुई
एविएशन
नेटवर्क
और
पायलट-क्रू
शिफ्ट
प्लानिंग
को
फिर
से
स्थिर
कर
सकेंगे।
हालांकि,
कंपनी
ने
फ्लाइट
ड्यूटी
टाइम
लिमिट
(FDTL)
नियमों
में
कुछ
अस्थायी
राहत
की
भी
मांग
रखी
है।
उनका
कहना
है
कि
मौजूदा
FDTL
नियम
काफी
कठोर
हैं,
जिससे
पायलटों
की
शिफ्ट
प्लानिंग
पर
असर
पड़
रहा
है।
सरकार
इस
मांग
पर
विचार
कर
रही
है,
लेकिन
यात्रियों
की
सुरक्षा
उसकी
मुख्य
प्राथमिकता
है।

नियामकीय
उल्लंघन
पर
पेनल्टी
का
खतरा

सरकारी
अधिकारियों
ने
साफ
कर
दिया
है
कि
इंडिगो
पर
भारी
पेनल्टी
लग
सकती
है,
खासकर
उन
मामलों
में
जहां
नियामकीय
ढिलाई,
संचालन
में
स्पष्ट
गड़बड़ी
या
यात्रियों
को
बड़ा
नुकसान
होने
की
बातें
सामने
आई
हैं।
यह
सख्ती
अन्य
एयरलाइंस
के
लिए
भी
एक
चेतावनी
है।
नागर
विमानन
मंत्रालय
(Ministry
of
Civil
Aviation)
स्तर
पर
भी
विमानों
की
तैनाती
और
स्लॉट
मैनेजमेंट
की
समीक्षा
जारी
है,
ताकि
देशभर
के
एयरपोर्ट्स
पर
उड़ानों
की
रफ्तार
सामान्य
हो
सके।
यात्रियों
की
सुविधा
सुनिश्चित
करने
के
लिए
सभी
पहलुओं
पर
बारीकी
से
जांच
की
जा
रही
है।


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व्यापक
रद्दकरण
और
बाजार
पर
असर

पिछले
चार-पांच
दिनों
से
जारी
इस
संकट
ने
इंडिगो
को
बुरी
तरह
प्रभावित
किया
है,
जिसकी
भारतीय
हवाई
बाज़ार
में
60%
हिस्सेदारी
है।
नए
FDTL
नियमों
के
कारण
कंपनी
की
व्यवस्था
चरमरा
गई,
जिससे
सैकड़ों
फ्लाइटें
रद्द
हुईं
या
देर
से
चलीं।
दिल्ली,
मुंबई,
पुणे,
बेंगलुरु
और
कोलकाता
जैसे
प्रमुख
एयरपोर्ट्स
पर
यात्रियों
को
भारी
परेशानी
झेलनी
पड़ी।
हालांकि
अन्य
एयरलाइंस
भी
प्रभावित
हैं,
लेकिन
इंडिगो
की
बड़ी
बाज़ार
हिस्सेदारी
के
कारण
संकट
का
असर
सबसे
ज्यादा
दिखाई
दे
रहा
है।


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