
मुंबई के गोवंडी क्षेत्र के रहने वाले 20 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र अयान शेख को महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने 4 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया है। सोशल मीडिया पर कथित उग्रवादी प्रचार से जुड़े डिजिटल सामग्री साझा करने के आरोप में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एटीएस के अनुसार अयान शेख इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय था और “पॉलिटिक्स एंड इस्लाम” नामक एक समूह सहित कई ऑनलाइन समूहों में शामिल था। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन समूहों में कथित तौर पर आतंकवादी संगठनों से संबंधित पीडीएफ, वीडियो और लिंक साझा किए जाते थे, जिनमें जिहाद से संबंधित भाषण, व्याख्यान और प्रचार सामग्री शामिल थी। एटीएस के अनुसार उसके मोबाइल फोन से कश्मीर से जुड़ी सामग्री, “गजवा” से संबंधित हदीस के संदर्भ, खिलाफत स्थापित करने से जुड़े लेखन तथा प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर की पुस्तक “फजाइल-ए-जिहाद” सहित अन्य सामग्री बरामद होने का दावा किया गया है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि अयान शेख टेलीग्राम समूहों में कुछ भड़काऊ संदेश भी पोस्ट कर रहा था। एटीएस का आरोप है कि इन संदेशों में जिहाद का आह्वान किया गया था और भारत के खिलाफ हिंसा भड़काने की कोशिश की गई थी। बरामद डिजिटल सामग्री में कथित तौर पर ऐसे संदेश भी पाए गए हैं जो राज्य के खिलाफ हिंसक कार्रवाई को बढ़ावा देने से जुड़े बताए जा रहे हैं।
एटीएस के अनुसार अयान शेख के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित है, जबकि धारा 196 और 197 धर्म या समुदाय के आधार पर वैमनस्य फैलाने और हिंसा भड़काने से संबंधित प्रावधानों से जुड़ी हैं। वहीं यूएपीए की धारा 38 आतंकवादी संगठन की सदस्यता और धारा 39 ऐसे संगठनों को समर्थन देने से संबंधित है।
जांच एजेंसी के मुताबिक 2 मार्च को दोपहर लगभग तीन बजे गोवंडी स्थित अयान शेख के घर पर छापा मारा गया था। इस दौरान उसका मोबाइल फोन, लैपटॉप, उसकी मां का मोबाइल फोन और उसकी बहन के नाम पर इस्तेमाल किए जा रहे पांच सिम कार्ड सहित कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। इन उपकरणों से प्राप्त डिजिटल सामग्री की जांच के बाद 4 मार्च को उसे गिरफ्तार किया गया।
अयान शेख के पिता यूसुफ शेख के अनुसार छापे के दौरान एटीएस अधिकारियों ने उन्हें बताया कि एक ऑनलाइन समूह में महाराष्ट्र के मत्स्य और बंदरगाह विकास मंत्री तथा भाजपा विधायक नितेश राणे के खिलाफ एक आपत्तिजनक संदेश पोस्ट किया गया था, जिसमें उन्हें इस्लाम और मुसलमानों का दुश्मन बताते हुए उन्हें समाप्त करने की बात कही गई थी। परिवार के अनुसार आरोप है कि अयान ने उस संदेश पर सहमति जताई थी, जिसे इस कार्रवाई का मुख्य कारण बताया गया।
अयान शेख गोवंडी का निवासी है और ए. ई. कलसेकर इंजीनियरिंग कॉलेज में डेटा साइंस शाखा में द्वितीय वर्ष का छात्र था। परिवार के अनुसार वह एक मेधावी छात्र है जिसने अपनी प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा भी इसी इलाके में पूरी की। उसके परिजनों का कहना है कि उसका दैनिक जीवन मुख्य रूप से कॉलेज, मस्जिद और घर तक सीमित था और वह नियमित रूप से पांचों वक्त की नमाज अदा करता था।
परिवार का दावा है कि अयान का किसी संगठित समूह से प्रत्यक्ष संपर्क नहीं था और वह जिन ऑनलाइन समूहों में शामिल था, उनके अधिकांश सदस्यों को वह व्यक्तिगत रूप से जानता भी नहीं था। परिवार के अनुसार जिस संदेश का उल्लेख किया जा रहा है वह केवल एक निजी ऑनलाइन बातचीत का हिस्सा था और इसके पीछे कोई योजना या साजिश नहीं थी।
इस मामले ने यह कानूनी बहस भी खड़ी कर दी है कि किसी निजी ऑनलाइन समूह में लिखे गए संदेश या किसी टिप्पणी से सहमति जताना क्या कठोर कानूनों के तहत अपराध माना जा सकता है। कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि देश की संप्रभुता को खतरे में डालने या आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ा अपराध सिद्ध करने के लिए केवल कथित संदेश पर्याप्त नहीं होते, बल्कि ठोस कार्रवाई या साजिश के प्रमाण भी आवश्यक होते हैं।
परिवार ने इस मामले में समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आसिम आजमी से भी संपर्क किया है। बताया जा रहा है कि आजमी ने महाराष्ट्र एटीएस प्रमुख नवल बजाज से मुलाकात कर परिवार की चिंताओं को रखने और विधानसभा के चालू सत्र में इस मुद्दे को उठाने का आश्वासन दिया है।
अयान की मां निखत शेख ने आरोप लगाया है कि छापे के दौरान अधिकारियों ने मौके पर ही उसके मोबाइल से कुछ संदेशों के स्क्रीनशॉट लेकर उनकी प्रिंट निकाली और अयान से उन पर हस्ताक्षर कराए। परिवार का कहना है कि बाद में उन्हें जब्ती पंचनामा या बरामद वस्तुओं की सूची की कोई प्रति नहीं दी गई, जिससे पूरी प्रक्रिया को लेकर संदेह पैदा हुआ है। इस संबंध में अयान के पिता ने पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर जांच की मांग की है।
इस बीच “इनोसेंट नेटवर्क” नामक एक गैर-लाभकारी संस्था ने मामले में कानूनी सहायता देने का निर्णय लिया है। मानवाधिकार वकील अधिवक्ता इब्राहिम हर्बर्ट अयान शेख की पैरवी कर रहे हैं। हर्बर्ट के अनुसार 7 मार्च को पुलिस हिरासत में अयान से मुलाकात के दौरान कुछ एटीएस अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और आपत्ति जताई, जिसके बाद उन्होंने अधिकारियों से उनकी पहचान बताने को कहा। वकील का कहना है कि ऐसी घटनाएं आरोपी के कानूनी प्रतिनिधित्व के अधिकार को प्रभावित कर सकती हैं।
फिलहाल इस मामले की जांच महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते द्वारा जारी है और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।




