दीघा में आज खुलने वाला है प्रभु जगन्नाथ का भव्य मंदिर, क्या है इसकी विशेषताएं और कैसे पहुंचे यहां? | Jagannathdham digha temple Inauguration on Akshaya Tritiya 30th April, specialties how to reach digha?
साल
2019
में
पश्चिम
बंगाल
की
मुख्यमंत्री
ममता
बनर्जी
ने
पूर्व
मिदनापुर
में
मौजूद
समुद्रतटीय
शहर
दीघा
में
जगन्नाथ
मंदिर
की
नींव
रखी
थी।
लगभग
5
सालों
में
इस
मंदिर
का
निर्माण
कार्य
पूरा
हो
चुका
है
और
आज
(30
अप्रैल)
यानी
अक्षय
तृतीया
के
शुभ
अवसर
पर
दीघा
में
नवनिर्मित
भव्य
जगन्नाथ
मंदिर
के
द्वार
खोल
दिए
जाएंगे।
इसके
साथ
ही
आम
भक्तों
के
लिए
मंदिर
के
द्वार
खुल
जाएंगे।
पश्चिम
बंगाल
की
मुख्यमंत्री
ममता
बनर्जी
28
अप्रैल
को
दीघा
पहुंच
चुकी
हैं
और
सबसे
पहले
उन्होंने
सारी
तैयारियों
का
जायजा
लिया।
इसके
बाद
मीडिया
को
संबोधित
करते
हुए
मुख्यमंत्री
ने
कहा
कि
दीघा
में
पहले
के
मुकाबले
अब
पर्यटकों
की
संख्या
बढ़
रही
है।
बड़ी
संख्या
में
विदेशी
पर्यटक
भी
दीघा
घूमने
के
लिए
आ
रहे
हैं।
ऐसे
में
यहां
भव्य
जगन्नाथ
मंदिर
की
स्थापना
से
अधिक
संख्या
में
पर्यटक
आकर्षित
होंगे।
दीघा
अब
पर्यटकों
को
बिल्कुल
अलग
अंदाज
में
दिखाई
देगा।

चलिए
अब
आपको
दीघा
के
इस
भव्य
जगन्नाथ
मंदिर
के
बारे
में
विस्तार
से
बताते
हैं
–
राम
मंदिर
से
है
समानता
जी
हां,
दीघा
के
जगन्नाथ
मंदिर
और
अयोध्या
के
राम
मंदिर
में
समानता
है।
लेकिन
यह
समानता
बनावट
या
डिजाइन
में
नहीं
बल्कि
कारीगरों
में
है।
दरअसल,
दीघा
के
जगन्नाथ
मंदिर
का
निर्माण
राजस्थान
के
करीब
800
कुशल
कारीगरों
ने
किया
है।
उन्होंने
इस
मंदिर
के
निर्माण
में
अधिकतर
गुलाबी
पत्थरों
का
इस्तेमाल
किया
है
जो
राजस्थान
में
ही
मिलती
है।
दीघा
के
मंदिर
का
निर्माण
जिन
कारीगरों
ने
किया
है,
उनमें
से
अधिकांश
कारीगरों
ने
अयोध्या
के
राम
मंदिर
का
भी
निर्माण
किया
है।
राम
मंदिर
की
तरह
ही
दीघा
में
भी
प्रभु
जगन्नाथ
की
पत्थर
से
निर्मित
मूर्ति
की
पूजा
की
जाएगी।
A moment to be cherished for eternity.
Today’s Dhwaja Uttolana and Maha Yajna set the tone for tomorrow’s Prana Pratishtha, as the Jagannath Temple in Digha prepares to welcome the Lord of the Universe to His sanctified abode.
Joy Jagannath 🙏🏻 pic.twitter.com/gEpSlM1lf7
— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) April 29, 2025 “>
शुरू
हो
चुका
है
मंत्रोच्चारण
जानकारी
के
अनुसार
दीघा
के
इस
भव्य
मंदिर
में
प्रभु
जगन्नाथ,
देवी
सुभद्रा
और
बड़े
भाई
बलराम
की
पत्थर
से
बनी
प्रतिमा
में
प्राण
प्रतिष्ठा
समारोह
के
दौरान
1
करोड़
वैदिक
मंत्रों
का
उच्चारण
किया
जाएगा।
इसके
बाद
मुख्यमंत्री
मंदिर
का
उद्घाटन
करेंगी।
दीघा
में
इस
समय
विधि-विधान
के
साथ
यज्ञ
आदि
का
आयोजन
किया
जा
रहा
है
जिसके
साथ
शंख
आदि
की
ध्वनि
ने
पूरा
माहौल
अध्यात्मिक
बना
दिया
है।
सोमवार
को
अश्व
यज्ञ
किया
गया।
वहीं
मंदिर
के
उद्घाटन
से
एक
दिन
पहले
जगन्नाथ
पुरी
के
पुजारी
राजेश
द्वैतपति
और
इस्कॉन
मंदिर
के
प्रतिनिधि
राधारमण
दास
शास्त्रीय
मतानुसार
पूजा-पाठ
कर
रहे
हैं।
मिली
जानकारी
के
अनुसार
आज
अक्षय
तृतीया
के
दिन
दोपहर
के
समय
मंदिर
का
उद्घाटन
किया
जाएगा।

क्या
होगी
इस
भव्य
मंदिर
की
विशेषताएं
–
-
दीघा
के
जगन्नाथ
मंदिर
का
निर्माण
पुरी
के
जगन्नाथ
मंदिर
के
तर्ज
पर
ही
‘सम्पूर्णा’
शैली
के
आधार
पर
किया
गया
है। -
मंदिर
के
निर्माण
राजस्थान
के
गुलाबी
पत्थरों
का
उपयोग
किया
गया
है। -
मंदिर
का
निर्माण
राजस्थान
के
लगभग
800
कुशल
कारीगरों
ने
किया
है। -
पुरी
की
तरह
लकड़ी
नहीं
बल्कि
दीघा
में
पत्थर
की
बनी
मूर्ति
में
जगन्नाथ
देव,
बलभद्र
व
देवी
सुभद्रा
की
पूजा
होगी। -
प्रवेशद्वार
के
ठीक
सामने
काले
रंग
के
पत्थर
से
अरुण
स्तंभ
का
निर्माण
किया
गया
है,
जिसके
ऊपर
अरुणा
की
प्रतिमा
है। -
मंदिर
में
चार
द्वार
हैं
–
पूर्व
में
मुख्य
प्रवेश
द्वार,
पश्चिम
में
व्यघ्र
द्वार,
उत्तर
में
हस्तीद्वार
और
दक्षिण
में
अश्वद्वार। -
मंदिर
के
चार
हिस्से
हैं
–
भोग
मंडप,
नाट
मंदिर,
जगमोहन
और
गर्भगृह। -
भोगमंडप
में
4
द्वार
होंगे। -
नाटमंदिर
में
16
स्तंभ
बनाए
गये
हैं।
नाट
मंदिर
की
दीवारों
पर
काले
रंग
के
पत्थरों
से
दशावतार
की
मूर्तियां
बनायी
गयी
हैं। -
जगमोहन
में
4
स्तंभ
हैं।
जगमोहन
एक
कॉरिडोर
की
तरह
है,
जिससे
होकर
गर्भगृह
तक
पहुंचा
जा
सकता
है। -
गर्भगृह
के
सिंहासन
पर
तीनों
देव-देवियों
की
मूर्तियां
विराजमान
हैं। -
मंदिर
में
ठीक
वैसा
ही
लक्ष्मी
मंदिर
है
जैसा
पुरी
के
जगन्नाथ
मंदिर
में
है। -
जगन्नाथ
देव
के
लिए
भोग
पकाने
के
लिए
अलग
व्यवस्था
होगी।
भगवान
को
56
प्रकार
के
भोग
अर्पित
किये
जाएंगे
जिसमें
सुक्का
और
पक्का
दोनों
तरह
के
भोग
शामिल
होंगे। -
पुरी
में
जैसे
प्रसाद
के
रूप
में
खाजा
का
प्रचलन
है,
ठीक
वैसे
ही
दीघा
के
जगन्नाथ
मंदिर
में
पेड़ा
और
गाजा
(एक
प्रकार
की
मिठाई)
प्रसाद
स्वरूप
प्रचलित
होगा।

कैसे
पहुंचे
दीघा?
हावड़ा
स्टेशन
से
दीघा
के
लिए
गरीब
रथ
समेत
कई
ट्रेन
खुलती
है।
सबसे
पहले
दीघा
स्टेशन
पर
उतरना
पड़ेगा।
वहां
से
116B
राष्ट्रीय
राजमार्ग
पकड़कर
ओल्ड
दीघा
की
ओर
लगभग
500
मीटर
चलने
पर
ही
आप
मंदिर
के
मुख्य
द्वार
तक
पहुंच
जाएंगे।
इसके
अलावा
कोलकाता
के
धर्मतल्ला
बस
स्टैंड
से
बड़ी
संख्या
में
बसें
खुलती
हैं
जो
ओल्ड
दीघा
होकर
दीघा
तक
ले
जाती
हैं।
अगर
आप
बस
से
जा
रहे
हैं
जो
दीघा
गेट
के
पास
उतरना
होगा।
वहां
से
लगभग
3
किमी
की
दूरी
पर
मंदिर
मौजूद
है।
वर्तमान
में
इस
दूरी
को
पैदल
ही
तय
करना
पड़ता
है
लेकिन
उम्मीद
की
जा
रही
है
कि
जल्द
ही
ई-रिक्शा
और
ऑटो
जैसी
सुविधाएं
यहां
उपलब्ध
हो
जाएंगी।
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