देश
का
सबसे
लंबा
मेट्रो
नेटवर्क
राष्ट्रीय
राजधानी
का
बताया
जाता
है।
दिल्ली
मेट्रो
जिस
तरह
से
अपनी
सुविधाओं
के
लिए
यात्रियों
में
लोकप्रिय
है,
ठीक
उसी
तरह
जब
दिल्ली
मेट्रो
का
कोई
वीडियो
सोशल
मीडिया
पर
वायरल
होता
है,
तो
लोग
इसे
किसी
अजूबे
से
कम
नहीं
समझते
हैं।
क्या
आपने
कभी
दिल्ली
मेट्रो
में
एक
दिन
बिताया
और
सोचा
कि
अगर
आप
चीन
की
मेट्रो
में
होते
तो
क्या
होता?
आज
हम
इसी
सवाल
का
जवाब
ढूंढने
निकलते
हैं,
वो
भी
हंसी-मजाक
के
साथ।
तो
अपना
मेट्रो
कार्ड
तैयार
रखें
और
हमारे
साथ
चलें
एक
मस्ती
भरे
सफर
पर
–
दिल्ली
मेट्रो
बनाम
चीन
मेट्रो!

दिल्ली
मेट्रो:
जहां
हर
कोने
में
एक
कहानी
है
दिल्ली
मेट्रो
में
एक
सीन
देखिए।
एक
तरफ
दीदी
नींद
में
डूबी
हुई
हैं,
सिर
दीवार
से
टकरा
रहा
है,
मानो
मेट्रो
की
रफ्तार
ने
उन्हें
थका
दिया
हो।
उनके
हाथ
में
स्मार्टवॉच
है,
लेकिन
नींद
इतनी
गहरी
कि
लगता
है
अलार्म
भी
इन्हें
जगा
नहीं
सकता।
दूसरी
तरफ
एक
भाई
साहब
फोन
में
व्यस्त
हैं
–
शायद
स्टॉक
मार्केट
देख
रहे
हैं
या
फिर
कोई
वायरल
रील,
लेकिन
चेहरा
ऐसा
कि
नींद
उनसे
भी
आंख
मिचौली
खेल
रही
है।
और
बीच
में
एक
भाई,
शांत,
सीधे-सादे
से।
ऐसे
बैठे
हैं
जैसे
मेट्रो
की
सैर
ही
उनका
मेडिटेशन
हो।
ये
है
हमारी
दिल्ली
मेट्रो
का
असली
रंग!
हर
कोने
में
एक
कहानी,
हर
चेहरे
पर
एक
अलग
भाव।
दिल्ली-NCR
में
मेट्रो
सिर्फ
एक
सवारी
नहीं,
बल्कि
एक
अनुभव
है।
यहां
आपको
“अरे
भैया,
थोड़ा
साइड
हो
जाओ”
सुनने
को
मिलेगा
और
अगर
आपकी
किस्मत
अच्छी
हुई
तो
कोई
अनजान
आंटी
अपनी
सीट
दे
देगी।
भीड़
में
धक्का-मुक्की
तो
होगी,
लेकिन
प्यार
भी
उतना
ही
है-कोई
भैया
आपका
भारी
बैग
पकड़
लेगा,
तो
कोई
दीदी
अपना
टिफिन
खोलकर
आपको
बिस्किट
ऑफर
कर
देगी।
लेकिन
हां,
दिल्ली
मेट्रो
में
एक
खास
बात
और
है-लोग
स्टेशन
मिस
कर
देते
हैं!
क्यों?
क्योंकि
झपकी
लेते-लेते
उन्हें
पता
ही
नहीं
चलता
कि
उनका
स्टेशन
आ
गया।
और
फिर
शुरू
होता
है
वो
हड़बड़ाहट
भरा
ड्रामा-दरवाजे
बंद
होने
से
पहले
भागमभाग,
“अरे
मेरा
स्टेशन
तो
पीछे
रह
गया!”
वाला
अफसोस।
दिल्ली
मेट्रो
में
यह
सब
आम
बात
है
और
यही
तो
इसकी
जान
है।
चीन
मेट्रो
:
अनुशासन
की
मिसाल
अब
बात
करते
हैं
चीन
की
मेट्रो
की।
वहां
का
सिस्टम
इतना
सख्त
और
व्यवस्थित
है
कि
लोग
सीधे
लाइन
में
बैठते
हैं-कोई
शोर
नहीं,
कोई
हलचल
नहीं।
सब
अपने
फोन
में
डूबे
हुए
हैं,
लेकिन
अनुशासन
ऐसा
कि
लगता
है
स्कूल
की
क्लास
चल
रही
हो।
वहां
“थोड़ा
साइड
हो
जाओ”
कहने
की
नौबत
ही
नहीं
आती,
क्योंकि
लोग
पहले
से
ही
साइड
में
होते
हैं।
चीन
की
मेट्रो
में
अनाउंसमेंट
इतनी
सटीक
है
कि
नींद
में
भी
आपको
अपना
स्टेशन
याद
रहता
है।
वहां
की
मेट्रो
सिस्टम
दुनिया
की
सबसे
लंबी
है-11,000
किलोमीटर
से
ज्यादा,
47
शहरों
में
310
लाइनों
के
साथ।
और
हां,
वहां
की
ट्रेनें
इतनी
साफ-सुथरी
हैं
कि
आपको
लगेगा
आप
किसी
फाइव-स्टार
होटल
में
बैठे
हैं।
लेकिन
एक
बात
है-चीन
की
मेट्रो
में
वो
देसी
टच
नहीं,
जो
हमारी
दिल्ली
मेट्रो
में
है।
वहां
सब
कुछ
सिस्टम
से
चलता
है,
प्यार
और
अपनापन
कम
दिखता
है।
दिल्ली
मेट्रो
का
देसी
टच
बनाम
चीन
का
सिस्टम
हमारी
मेट्रो
में
वो
देसी
टच
है
जो
हमें
“अपना”
लगता
है।
चाहे
वो
भाई
की
झपकी
हो,
आंटी
का
टिफिन
हो
या
फिर
भीड़
में
“एडजस्ट
कर
लो
भैया”
वाला
जज्बा।
दूसरी
तरफ,
चीन
की
मेट्रो
हमें
सिखाती
है
कि
थोड़ा
अनुशासन
भी
बुरा
नहीं।
वहां
लोग
सिविक
सेंस
को
गंभीरता
से
लेते
हैं-कोई
कचरा
नहीं,
कोई
शोर
नहीं
और
सबसे
बड़ी
बात,
कोई
स्टेशन
मिस
नहीं
करता!
लेकिन
सच
कहा
जाए
तो
दिल्ली
मेट्रो
की
मस्ती
का
कोई
जवाब
नहीं।
हमारे
यहां
की
मेट्रो
में
वह
रंग
है,
वह
हंसी
है
जो
हमें
अपनेपन
का
एहसास
कराती
है।
हां,
थोड़ा
सिविक
सेंस
हम
भी
सीख
सकते
हैं,
लेकिन
वो
प्यार
और
अपनापन
जो
दिल्ली
मेट्रो
में
मिलता
है,
वह
चीन
की
किसी
मेट्रो
में
नहीं
मिलेगा।
अगली
बार
मेट्रो
में
क्या
करें?
तो
दिल्ली-NCR
वालों,
अगली
बार
जब
आप
दिल्ली
मेट्रो
में
चढ़ें,
तो
मोबाइल
में
घुसे
रहने
के
बजाए
अपने
आसपास
के
किरदारों
को
गौर
से
देखें।
उस
झपकी
लेते
भाई
को
देखकर
मुस्कुराएं,
उस
आंटी
को
थैंक्यू
बोलें
जो
आपको
सीट
देती
है
और
भीड़
में
थोड़ा
एडजस्ट
करना
सीखें।
क्योंकि
यह
अनुभव,
ये
कहानियां
सिर्फ
हमारी
दिल्ली
मेट्रो
में
ही
मिलेंगी।
चीन
की
मेट्रो
भले
ही
100
साल
आगे
हो,
लेकिन
हमारी
दिल्ली
मेट्रो
दिल
से
चलती
है।
तो
अपने
मेट्रो
कार्ड
को
रिचार्ज
करें
और
इस
अनोखे
सफर
का
मजा
लें-क्योंकि
दिल्ली
मेट्रो
सिर्फ
एक
सवारी
नहीं,
बल्कि
एक
यादगार
अनुभव
है!
आपकी
अपनी
दिल्ली
मेट्रो
की
सैर
को
सलाम!






