संसद के शीतकालीन अधिवेशन के पहले ही दिन कांग्रेस ने चुनावी मतदार सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के विरोध में जोरदार प्रदर्शन कर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने सांसद भवन परिसर के मकर द्वार के सामने SIR प्रक्रिया को “मतदाता वंचित करने का औजार” बताते हुए तत्काल व्यापक चुनाव सुधारों पर चर्चा की मांग की। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने “स्टॉप SIR – स्टॉप वोट चोरी” लिखे पोस्टर और बैनर के साथ नारेबाजी की। डीएमके के कनीमोळी और टी. आर. बालू सहित सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेता भी इस विरोध में शामिल हुए।
इसी मुद्दे पर लोकसभा में बार-बार स्थगन और राज्यसभा में विपक्ष के वॉकआउट से पूरे दिन हंगामा जारी रहा। सरकार ने चर्चा का विरोध न करने की बात तो कही, पर तत्काल बहस पर सहमति नहीं दी, जिससे टकराव और बढ़ गया। इस विरोध से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर संसद को “चुनावों की वॉर्म-अप एरीना” बनाने का आरोप लगाते हुए चुटकी ली थी कि वह चाहें तो राजनीति में सकारात्मकता लाने के “कुछ टिप्स” भी दे सकते हैं। विपक्ष ने साफ किया कि मतदार सूची संशोधन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना वह पीछे नहीं हटेगा और वैध मतदाताओं को वंचित करने की किसी भी कोशिश का संसद के भीतर और बाहर कड़ा प्रतिरोध किया जाएगा।






