मुंबई : (प्रतिनिधि) संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान, आरे वन परिमंडल क्षेत्र में आरक्षित वन भूमि पर बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएँ, राजस्व चोरी तथा पैराग्रास घास की अवैध कटाई और बिक्री किए जाने का गंभीर आरोप प्रकृतिप्रेमी व विद्रोही पत्रकार डॉ. राजन माकनिकर ने लगाया है।
राजस्व एवं वन विभाग की संयुक्त अधिसूचना के अनुसार दिनांक १२ अक्टूबर २०२० को आरे दुग्धशाला क्षेत्र, गोरेगांव (पूर्व), के २८६.१३२ हेक्टेयर क्षेत्रफल को आरक्षित वन घोषित किया गया था। तत्पश्चात ०७ जून २०२१ को यह क्षेत्र संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (बोरिवली) प्राधिकरण को विधिवत हस्तांतरित किया गया। भारतीय वन अधिनियम १९२७ के अंतर्गत वन सीमाओं को दर्शाने हेतु सिमेंट पोल व सूचना फलक स्थापित किए गए।
इसके बावजूद यूनिट क्रमांक २, ३, ४ व १३ सहित लगभग ५० से ८० एकड़ क्षेत्र में अवैध रूप से पैराग्रास की कटाई कर उसे रात के समय मुंबई उपनगरों के तबेलों में बेचे जाने के पुख्ता सबूत होने का दावा किया गया है।
डॉ. माकनिकर का आरोप..,
*“घास काटने वालों से वन अधिकारियों तक हर महीने पैकेट पहुँचाए जाते हैं।”
“राजस्व सरकार तक न पहुँचकर निजी स्तर पर दबाया जा रहा है।”
“लाखों रुपये का राजस्व चोरी हुआ है और सरकार को भारी नुकसान हो रहा है।”
इसके अलावा २०१३ से आरक्षित घोषित नगर भूमापन क्रमांक १६८९ व १६९० के १९० एकड़ क्षेत्र में भी इसी प्रकार के अवैध कार्य जारी होने की बात कही गई है।
डॉ. माकनिकर के अनुसार वर्तमान एवं पूर्व अधिकारियों में.., तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी – नरेंद्र मुटे, वनरक्षक – महेंद्र मोरे, अतिरिक्त वनपाल – सतीश डोईफोडे, तत्पश्चात कार्यभार – शांताराम गोरे, वर्तमान वनपाल – एन. बी. खुटाळे,
डॉ. राजन माकणीकर का दावा हैं की, “इन अधिकारियों के संरक्षण के बिना ऐसा रैकेट संभव ही नहीं हैं।”
वन क्षेत्र में सुरक्षा-दीवार निर्माण के बावजूद.., कचरा फेंकना, अवैध गतिविधियाँ, पैराग्रास की नक़ली बिक्री, लगातार जारी रहने का आरोप सामने आया है।
के. ईश्वरचरणी फाउंडेशन की ओर से डॉ. राजन माकणीकर द्वारा, सभी वर्तमान और पूर्व अधिकारियों की वंशावली व संपत्ति जाँच की जाय. बकाया राजस्व की वसूली कर ले. आरोपियों पर आपराधिक जाँच करे. अवैध कटाई पर तत्काल रोक लगाये. आदी जैसी प्रमुख माँगें प्रशासन को भेजी गई हैं।
यह गंभीर मामला होने के कारण
राज्य सरकार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक व जाँच एजेंसियों से
तत्काल हस्तक्षेप की माँग
डॉ. माकनिकर एवं उनकी टीम द्वारा की गई है।





